जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली: कोरोना की वजह से केंद्र के राजस्व पर वित्त वर्ष 2020-21 में जो असर पड़ा था, उसका प्रभाव राज्यों के वित्तीय प्रदर्शन पर भी दिखा था। चालू वित्त वर्ष में केंद्र ने तो राज्यों को काफी मदद देकर उनकी वित्तीय स्थिति को सुधारा है, लेकिन बाजार से उधारी लेने की वजह से राज्यों के खजाने की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। बहरहाल, इस स्थिति में इस वर्ष अप्रैल से शुरू हो रहे वित्त वर्ष के दौरान काफी सुधार आने की उम्मीद है। इसकी मुख्य वजह यह है कि एक तरफ जीएसटी संग्रह बढ़ने से केंद्र की तरफ से राज्यों को ज्यादा राजस्व हिस्सेदारी मिलेगी। दूसरी तरफ उन्हें खुले बाजार से अधिक कर्ज भी नहीं लेना पड़ेगा। इसके साथ ही कोरोना काल में बिजली क्षेत्र समेत कई अन्य सुधारों के लिए बहुत ही कम दर पर कर्ज देने की घोषित योजना भी अब रफ्तार पकड़ने वाली है। इन सबका फायदा राज्यों को मिलेगा।

केंद्र की तरफ से वर्ष 2022-23 के दौरान ढांचागत क्षेत्र के विकास के लिए राज्यों को एक लाख करोड़ रुपये की राशि का आवंटन किया गया है, जो राज्यों को काफी राहत देने वाली है। इसका फायदा यह होगा कि अपने व्यय के एक बड़े हिस्से को राज्य सरकारें दूसरे सामाजिक विकास के कार्यों पर खर्च कर सकेंगी। आम बजट में हुई इस घोषणा के जरिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने उन राजनीतिक विरोधियों को भी जवाब दिया जो राज्यों के आर्थिक हितों की अवहेलना और केंद्र-राज्यों के रिश्तों को बिगाड़ने का आरोप लगाते हैं। वर्ष 2020-21 में जीएसटी संग्रह में भारी गिरावट होने पर जब केंद्र की तरफ से राज्यों को कम टैक्स आवंटन किया गया तो गैर-भाजपा शासित कई राज्यों ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया था। लेकिन चालू वित्त वर्ष के दौरान हालात पूरी तरह से बदल गए हैं।

पिछले महीने वित्त मंत्रालय ने राज्यों को 95,082 करोड़ रुपये का आवंटन किया है, जबकि उन्हें सिर्फ 47,541 करोड़ रुपये का आवंटन किया जाना था। इसके अलावा जीएसटी क्षतिपूर्ति की पूरी राशि भी राज्यों को समय पर दी जा रही है। अक्टूबर, 2021 तक के लिए राज्यों को 1.59 लाख करोड़ रुपये की राशि दी जा चुकी है। इस बारे में एसबीआइ रिसर्च की एक रिपोर्ट कहती है कि केंद्र से ज्यादा राशि मिलने की वजह से ही वर्ष 2021-22 में राज्यों को अनुमान से दो लाख करोड़ रुपये कम कर्ज लेने पड़ेंगे। पहले इनकी तरफ से 7.8 लाख करोड़ रुपये की राशि बतौर कर्ज लेने की संभावना थी, जिसे अब 5.8 लाख करोड़ रुपये रखा गया है।

एसबीआइ की इकोरैप रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले वर्ष राज्यों की वित्तीय स्थिति में काफी सुधार के लक्षण मिल रहे हैं। इसकी एक अन्य प्रमुख वजह यह भी है कि अधिकांश राज्यों ने चुनौतीपूर्ण समय में अपने खर्चे को नियंत्रित करने का सराहनीय काम किया है। 18 बड़े राज्यों में से नौ ने शुरुआती आठ महीनों में अपने कुल बजट आवंटन का 50 प्रतिशत भी खर्च नहीं किया है। वहीं, 18 में से 12 राज्यों ने इस दौरान बजट में अनुमानित राजस्व का 55 प्रतिशत हासिल कर लिया है।

Edited By: Amit Singh

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