यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 23, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
क्या होती है टैक्सेबल इनकम, किस आय पर देना होता है आपको टैक्स
जब एक व्यक्ति की आय एक तय सीमा से ज्यादा हो जाती है तो यह टैक्स के दायरे में आ ...और पढ़ें

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत में व्यक्ति की आय एक तय सीमा से ज्यादा हो तो उन्हें आय पर टैक्स देना होता है। टैक्स योग्य आय की गणना आयकर अधिनियम, 1961 के निर्धारित नियमों और विनियमों के आधार पर की जाती है।
इसके साथ ही किसी एक वित्त वर्ष में व्यक्ति या कंपनी/संस्था पर बनने वाली देनदारी, जिसका भुगतान उसे सरकार को करना होता है, को समझना जरूरी है।
इस आर्टिकल में आप अपनी कर देनदारी को लेकर सही फैसला लें, इसके लिए आय के उन हिस्सों को लेकर जानकारी दे रहे हैं, जो कर के दायरे में आता है। साथ ही जानेंगे कि आय का कौन-सा हिस्सा कर के दायरे से बाहर होता है।
क्या होती है कर योग्य आय
ClearTax टैक्स विशेषज्ञ, मनिकंदन एस के मुताबिक, कर योग्य आय किसी व्यक्ति या संस्था की कुल आय का वह हिस्सा होता है, जिस पर उसे आय कर या इनकम टैक्स का भुगतान करना होता है।

इसमें वेतन, पेंशन, पूंजीगत लाभ, किराये की आय, व्यावसायिक आय, निवेश आय और बिना कमाई हुई आय समेत इनकम के कई अलग-अलग स्रोत शामिल होते हैं।
हालांकि, कर योग्य आय की गणना करते वक्त ग्रॉस इनकम में से आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के मुताबिक डिडक्शंस और छूट को घटा दिया जाता है।
नियमों के मुताबिक आमदनी के अधिकांश स्रोत कर के दायरे में आते हैं लेकिन इनमें कुछ अपवाद हैं, जिस पर कर का भुगतान नहीं करना होता है।
उदाहरण के लिए किसी विशेष धार्मिक संस्था से जुड़ा व्यक्ति जिसने गरीबी की शपथ ली है और वह उस संस्था के लिए काम करता है तो उससे हासिल कोई भी आय आम तौर पर कर के दायरे से मुक्त होती है।
किसी प्रियजन की मृत्यु पर प्राप्त कोई राशि या जीवन बीमा भुगतान की राशि को भी कर के दायरे से बाहर रखा गया है, बशर्ते वे विशिष्ट शर्तों को पूरा करते हों।
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आयकर का भुगतान किसे करना जरूरी है?
आयकर अधिनियम 'व्यक्ति' शब्द को व्यापक रूप से परिभाषित करता है, जिसमें प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों संस्थाएं शामिल हैं।

इसमें व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ), व्यक्तियों के संघ (एओपी), व्यक्तियों के निकाय (बीओआई), फर्म, लिमिटेड लाएबिलिटी पार्टनरशिप्स (एलएलपी), कंपनियां, स्थानीय प्राधिकरण और कोई भी कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति (एजेपी) शामिल हैं, जो उपर्युक्त किसी भी श्रेणी में शामिल नहीं हैं।
इन सभी संस्थाओं को उनकी कर योग्य आय के आधार पर इनकम टैक्स का भुगतान करना होता है।
हम टैक्सेबल इनकम का निर्धारण कैसे करते हैं?
कर योग्य आय का निर्धारण करने में कई महत्वपूर्ण चरण शामिल हैं। सबसे पहले कर का भुगतान करने वाले को रोजगार, कारोबार, पूंजीगत लाभ और अन्य स्रोतो समेत आय के सभी स्रोतों से हासिल इनकम की गणना करनी चाहिए।
इन सभी आय का जोड़ ग्रॉस टोटल इनमक होगा, जो किसी भी व्यक्ति या संस्था की कुल आय होगी। इसके बाद आयकर अधिनियम, 1961 के तहत योग्य कटौतियां और छूट को शामिल करना होता है, जो कर देनदारी को कम कर देता है।
ग्राॉस टोटल इनकम से छूट और कटौतियों को घटाने के बाद बची आय ही वह रकम होती है, जिस पर किसी को कर का भुगतान करना होता है।
अगर इसके बाद आपकी कुल आय निर्धारित टैक्स स्लैब से अधिक होती है, तो आपको टैक्स का भुगतान करना होता है। यही टैक्स देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
टैक्सपेयर को एक निश्चित फॉर्मेट में अपनी आय का विवरण देना होता है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।

