सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Behavioural Biases क्या है और कैसे यह आपके निवेश को प्रभावित करते हैं?

By Branded DeskEdited By: Chandrashekhar Gupta
Published: Thu, 08 Jan 2026 05:52 PM (IST)Updated: Fri, 09 Jan 2026 11:25 AM (IST)

SLA Finserv के फाउंडर और CEO आशीष मोदानी के अनुसार "बिहेवियरल बायस का अर्थ है सोचने का वह पैटर्न, जो ...और पढ़ें

News Article Hero Image

नई दिल्ली। ऐसा देखा गया है कि रिटेल निवेशक अपनी सूझबूझ से ज्यादा अपने इमोशन से निवेश के फैसले लेते हैं। इसलिए मार्केट के गुरु अपनी मर्जी से ऐसे निवेशकों के इमोशन के साथ खेलने के लिए तैयार रहते हैं। इसे बिहेवियरल बायस (Behavioural Biases) कहा जाता है। दरअसल, निवेश में बिहेवियरल बायस सिस्टमैटिक, साइकोलॉजिकल पैटर्न या मेंटल शॉर्टकट (ह्यूरिस्टिक्स) होते हैं जो निवेशकों को लॉजिकल, डाटा-ड्रिवन फैसलों के बजाय इरेशनल, इमोशनल फैसले लेने पर मजबूर करते हैं, जिससे वो खराब फैसले लेता है जैसे ट्रेंड्स को फॉलो करना (हर्डिंग), घाटे वाले स्टॉक्स को बहुत लंबे समय तक होल्ड करना (लॉस एवर्जन), अपनी स्किल्स को ज्यादा आंकना (ओवरकॉन्फिडेंस) या अपनी अभी की जानकारी पर ज्यादा भरोसा करना (एंकरिंग)।

SLA Finserv के फाउंडर और CEO आशीष मोदानी के अनुसार "बिहेवियरल बायस का अर्थ है सोचने का वह पैटर्न, जो बार-बार हमें गलत निर्णय लेने पर मजबूर कर देता है। इसमें भावनाएं ज्ञान पर हावी हो जाती हैं।"

रिटेल निवेशकों के बीच हुई स्टडी

भारतीय रिटेल निवेशकों के बीच की गई स्टडी में पाया गया है कि हर्डिंग, लॉस एवर्जन, ओवरकॉन्फिडेंस और एंकरिंग सबसे आम बायस हैं। ऐसा देखा गया है कि निवेशक मार्केट की जानकरी रखते हुए भी मार्केट के क्रैश होने के बाद निवेशित रहने या एवरेजिंग करने के बजाय मार्केट से अपने पैसे निकालने लगते हैं। उन्हें मार्केट रिस्की लगने लगता है। वहीं दूसरी तरफ, जब मार्केट में सभी पैसे लगाते हैं तो उस समय रिटेल निवेशक चढ़ते मार्केट में पैसे लगाने लगते हैं। इस तरह के व्यवहार में निवेश के लिए सूझबूझ कम भावनाएं ज्यादा काम करती हैं।

बिहेवियरल बायस का संबंध इंसानी विकास से भी रहा है। यह एक तरह की प्रवृत्तियां हैं, जो हमारे दिमाग में गहरे रूप से जम चुकी हैं। एक्सपर्ट मानते हैं कि जब मानव का विकास हुआ तब हम जीवन रक्षा के लिए जानवरों और सांपो से डरते थे। पूर्वाग्रह और अंधविश्वास के जरिए अपने जीवन को आगे बढ़ाते थे। उस समय ज्यादातर हमारे फैसले इमोशन की वजह से तर्कहीन होते थे। जैसे-जैसे मानव का विकास हुआ और हमने धन एकत्रित करना शुरू किया, तब धन को लेकर हमारे फैसले तर्कहीन होने लगे। हम विकसित होते गए, लेकिन हमारे व्यवहार में शुरू से लेकर अब तक ज्यादा बदलाव नहीं आया।

बिहेवियरल बायस के क्या लक्षण?

एक निवेशक के अंदर बिहेवियरल बायस के लक्षण क्या होते हैं, इस पर आशीष मोदानी कहते हैं, "जैसे कोई निवेशक बोलता है कि वह लॉन्ग टर्म के लिए निवेश कर रहा है और उसे मार्केंट मूवमेंट से कोई फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन असल में वह बार-बार अपने इन्वेस्टिंग ऐप को खोलकर पोर्टफोलियो लगातार चेक करता है। अगर वह वास्तविक रूप से लॉन्ग टर्म निवेशक होगा, तो वह रोजाना की जगह तीन या छह महीने में अपना पोर्टफोलियो चेक करेगा।"

निवेश के दौरान हर कोई चाहता है कि उसे 100 फीसदी रिटर्न मिले, लेकिन इसी लालच की वजह से वे अपने पैसे गवां देते हैं। हमें समझना होगा कि एक अच्छे ट्रेडर, निवेशक और बिजनेसमैन को भी नुकसान होता है। समस्या है कि हम नुकसान चाहते नहीं हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि अगर आप भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था में पैसे बनाना चाहते हैं तो आपको एक अच्छे डायवर्सिफाइड फंड में पैसे लगाना चाहिए, जो लॉन्ग टर्म के लिए होगा। इसके बाद आपका फंड मैनेजर आपके इस फंड की ग्रोथ का ध्यान देगा। जब आप लगातार अपने फंड में निवेश करेंगे तो आपको बेहतर रिटर्न मिलेगा।

बेहतर रिटर्न के लिए एक फाइनेंशियल एडवाइजर आपकी मदद कर सकता है। इस पर आशीष मोदानी कहते हैं, “ज्यादातर लोग भावनाओं की जाल में फंस जाते हैं। आप हर जगह विशेषज्ञ नहीं हो सकते। म्यूचुअल फंड ने अब तक सालाना 12-15% का रिटर्न दिया है, लेकिन डेटा के मुताबिक निवेशकों ने औसतन 7-8% रिटर्न कमाए हैं। यही 4-5% के गैप को बिहेवियरल मिस्टेक कहते हैं। फाइनेंशियल एडवाइजर इसी गैप को फायदे में बदल सकता है।”

(Disclaimer: इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के हैं और जागरण न्यू मीडिया कंपनी के विचारों को नहीं दर्शाते हैं। इसमें दिया गया कॉन्टेंट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी निर्णय लेने से पहले किसी योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। जागरण न्यू मीडिया कंपनी जानकारी की सटीकता की गारंटी नहीं देती है और किसी भी वित्तीय परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है। सभी निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं।)