दावोस, पीटीआइ। स्विट्जरलैंड के दावोस में करीब दो साल बाद होने जा रहे सालाना विश्व आर्थिक मंच (WEF) में हिस्सा लेने के लिए भारत से करीब 100 से ज्यादा कंपनियों के सीईओ और एक दर्जन से अधिक मंत्री और मुख्यमंत्रियों के पहुंचने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल निवेश जुटाने के साथ कोरोना महामारी से जुड़े अनुभवों को भी साझा करेगा। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।

इन मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना: सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे अधिकांश सीईओ इस बात पर सहमत हैं कि भविष्य में कोरोना जैसी महामारी से निपटने को आधारभूत ढांचा बनाया जाना आवश्यक है। मौजूदा महामारी को हराने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, क्रिप्टोकरेंसी, बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका और वैश्विक स्तर पर बढ़ती लागत जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।

ये कारोबारी हिस्सा लेंगे

इस सम्मेलन में देश के प्रमुख कारोबारियों के भाग लेने की उम्मीद है। इनमें अदाणी समूह के गौतम अदाणी, संजीव बजाज, हरि एस भरतिया, श्याम सुंदर भरतिया, कुमार मंगलम बिड़ला, शोभना कामिनेनी, राजन एवं सुनील मित्तल और पवन मुंजाल आदि के नाम शामिल हैं।

कई युवा कारोबारी भी हिस्सा लेंगे

सम्मेलन में कई युवा कारोबारियों के भी हिस्सा लेने की उम्मीद है। इनमें सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला, एचसीएल टेक की चेयरपर्सन रोशनी नदार मल्होत्र, क्वाइनस्विच के फाउंडर और सीईओ आशीष सिंघल, ईजमाईटिप के को-फाउंडर प्रशांत पिट्टी, ओयो रूम्स के सीईओ रितेश अग्रवाल, ईकोवेयर साल्यूशंस के सीईओ रेहा मजूमदार सिंघल, बायजूस के फाउंडर और सीईओ बायजू र¨वद्रन शामिल हैं।

इन राज्यों ने बनाए पवेलियन

सम्मेलन में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र ने पवेलियन बनाया है। इसके अलावा इन राज्यों के मुख्यमंत्री या मंत्री हिस्सा लेने के लिए दावोस पहुंच रहे हैं। इन राज्यों का मकसद ज्यादा से ज्यादा निवेश जुटाना है।

कहां है दावोस

दावोस स्विटजरलैंड का एक छोटा सा शहर है। यह चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा है और हर समय बर्फ से ढका रहता है। यह यूरोप का सबसे ऊंचा शहर है। दावोस झील यहां की सबसे बड़ी झील है।

क्या है विश्व आर्थिक मंच

विश्व आर्थिक मंच की स्थापना जनवरी 1971 में की गई थी। शुरुआत में इसका नाम यूरोपियन मैनेजमेंट फोरम रखा गया था। दो साल बाद इस सम्मेलन में दुनियाभर की 1000 कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। 1979 में एक रिपोर्ट में इस संगठन के वैश्विक स्तर पर विस्तार की बात कही गई। इसके बाद 1987 में इसका नाम बदलकर विश्व आर्थिक मंच रखा गया। 2015 में इस संगठन को औपचारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय संगठन की मान्यता मिली। इस समय करीब 190 देश इस संगठन के सदस्य हैं।

Edited By: Manish Mishra