अब अफ्रीका में झंडा गाड़ेगी अनिल अग्रवाल की वेदांता, बनाएगी सबसे बड़ा स्मेल्टर प्लांट; प्रोडक्शन में 70000 टन की छलांग
Anil agarwal Vedanta New Smelter Plant: भारतीय उद्योगपति अनिल अग्रवाल की वेदांता रिसोर्सेज जाम्बिया में अफ्रीका का सबसे बड़ा कॉपर ...और पढ़ें
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वेदांता बनाएगी सबसे बड़ा स्मेल्टर प्लांट
HighLights
वेदांता जाम्बिया में अफ्रीका का सबसे बड़ा कॉपर स्मेल्टर बनाएगी।
इससे सालाना तांबे के उत्पादन में 70,000 टन की वृद्धि होगी।
अनिल अग्रवाल की कंपनी ने जाम्बिया में बड़ा निवेश किया है।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: भारतीय उद्योगपति और माइनिंग दिग्गज वेदांता रिसोर्सेज (Vedanta Resource) के चेयरमैन अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) अब अफ्रीकी महाद्वीप में एक नया इतिहास रचने जा रहे हैं। 'बिलियनेयर्स अफ्रीका' की रिपोर्ट के अनुसार, अनिल अग्रवाल जाम्बिया (Zambia) में एक ऐसा मेगा-प्रोजेक्ट तैयार कर रहे हैं, जो बनकर तैयार होने के बाद पूरे अफ्रीका का सबसे बड़ा कॉपर स्मेल्टर (Copper Smelter) होगा।
कंपनी ने किया बड़ा दावा
कोंकोला कॉपर माइन्स ने गुरुवार, 17 सितंबर को कहा कि वह जाम्बिया में एक नया स्मेल्टर बना रही है, जिससे सालाना 70,000 टन क्षमता बढ़ेगी। कंपनी को उम्मीद है कि यह प्लांट अफ्रीका में अपनी तरह का सबसे बड़ा प्लांट होगा।
कंपनी ने यह काम चीनी इंजीनियरिंग ग्रुप NERIN को सौंपा है, हालांकि कॉन्ट्रैक्ट अभी लागू नहीं हुआ है और यह एडवांस पेमेंट जैसी शर्तों पर निर्भर करता है। कोंकोला ने यह नहीं बताया है कि स्मेल्टर पर कितना खर्च आएगा या यह कब तक बनकर तैयार होगा।
कौन करेगा इस खदान पर कंट्रोल?
इस खदान का कंट्रोल अनिल अग्रवाल के पास है। उनकी लंदन में रजिस्टर्ड कंपनी 'वेदांता रिसोर्सेज' की सब्सिडियरी 'कॉपरटेक मेटल्स' के जरिए 'कोनकोला' में 79.4% हिस्सेदारी है, और बाकी 20.6% हिस्सेदारी जाम्बिया सरकार की माइनिंग इन्वेस्टमेंट कंपनी 'ZCCM इन्वेस्टमेंट्स होल्डिंग्स' के पास है।
कोंकोला में फिर से शुरू हुआ रुका हुआ काम
यह घोषणा कोंकोला स्मेल्टर के फिर से चालू होने के कुछ दिन बाद हुई। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की सीमा के पास कॉपरबेल्ट प्रांत में चिंगोला स्थित नचांगा प्लांट ने 106 दिनों तक बंद रहने के बाद अपना पहला एनोड तैयार किया है। कोंकोला ने सोमवार, 21 सितंबर को इसकी पुष्टि की। इस प्लांट को बंद करने की घोषणा 29 मई को 60 दिनों के नवीनीकरण (रिफर्बिशमेंट) के लिए की गई थी, इसलिए यह योजना से 46 दिन ज्यादा समय तक बंद रहा।
इसके साथ ही बता दें कि जाम्बिया ने एक बार वेदांता से खदान वापस ले ली थी। सरकार ने 2019 में कोंकोला को प्रोविजनल लिक्विडेशन में डाल दिया था। कंपनी पर आरोप था कि उसने अपने विस्तार की योजनाओं के बारे में झूठ बोला और बहुत कम टैक्स दिया। इस मामले को लेकर दोनों पक्षों के बीच पाच साल तक विवाद चला। 2024 में, कोर्ट से मंजूर योजना पर सहमति बनने और लेनदारों को लगभग 246 मिलियन डॉलर का भुगतान करने के बाद वेदांता को खदान का कंट्रोल वापस मिल गया।
इसे वापस पाने के साथ कुछ वादे भी किए गए थे। वेदांता ने ऑपरेशन को बेहतर बनाने और कर्ज चुकाने के लिए पांच सालों में 1.2 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च करने का वादा किया था। मैनेजमेंट संभालने के बाद से कंपनी ने 40 करोड़ डॉलर से ज्यादा रकम लगाई है, जिसमें लेनदारों का बकाया चुकाने के लिए 25 करोड़ डॉलर और 12.4 करोड़ डॉलर की एक और किस्त शामिल है।
कॉपर किंग बनी वेदांता
वेदांता ने कोंकोला की ओनरशिप और उसे चलाने के लिए नवंबर 2025 में अमेरिका में कॉपरटेक मेटल्स को लॉन्च किया था। कॉपरटेक मेटल्स ने कहा है कि वह इस खदान पर वेदांता द्वारा 2004 से अब तक खर्च किए गए लगभग 3 अरब डॉलर के अलावा, और 1.5 अरब डॉलर का निवेश करने का इरादा रखती है।
सरकार की क्या है उम्मीद?
जाम्बिया इससे कहीं ज्यादा चाहता है। राष्ट्रपति हाकाइंडे हिचिलेमा ने 10 सितंबर को वेदांता से कहा कि वह खदान के लिए अपनी बिजली बनाने का काम तेजी से करे। उनकी सरकार का लक्ष्य है कि अगले दस सालों में देश में तांबे का उत्पादन 30 लाख टन तक पहुंच जाए। जाम्बिया की कुल एक्सपोर्ट कमाई में तांबे का हिस्सा 70% से ज्यादा है, और हर अतिरिक्त टन उत्पादन के लिए ऐसी बिजली की जरूरत होगी जो अभी ग्रिड के पास उपलब्ध नहीं है।
अग्रवाल ने बॉम्बे में स्क्रैप मेटल के कारोबार से शुरुआत की थी और सरकारी संपत्तियां खरीदकर वेदांता को खड़ा किया। उन्होंने 2001 में भारत एल्युमीनियम और 2002 में हिंदुस्तान जिंक को भारत सरकार से खरीदा। 2003 में उन्होंने वेदांता रिसोर्सेज को लंदन में लिस्ट कराया – ऐसा करने वाली वह पहली भारतीय कंपनी थी – और 2018 में इसे फिर से प्राइवेट कर लिया।
