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'कोर्ट तय करे, हम जिंदा रहें या नहीं', 700 छोटे कारोबारियों ने ट्रंप पर किया था मुकदमा; अपने राष्ट्रपति को ऐसे हराया

Published: Fri, 20 Feb 2026 10:51 PM (IST)Updated: Sat, 21 Feb 2026 01:08 AM (IST)

Small Businesses Challenge Trump Tariffs: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को गैरकानूनी करार दे दिया। ऐसे में ...और पढ़ें

'कोर्ट तय करे, हम जिंदा रहें या नहीं', 700 छोटे कारोबारियों ने ट्रंप पर किया था मुकदमा; अपने राष्ट्रपति को ऐसे हराया

'कोर्ट तय करे, हम जिंदा रहें या नहीं', 700 छोटे कारोबारियों ने ट्रंप पर किया था मुकदमा; अपने राष्ट्रपति को ऐसे हराया

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को गैरकानूनी बताया

  2. 700 से अधिक छोटे कारोबारियों ने चुनौती दी थी

  3. टैरिफ से छोटे व्यवसायों का अस्तित्व खतरे में था

नई दिल्ली| अमेरिका के 700 से ज्यादा छोटे कारोबारियों ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के टैरिफ को कोर्ट में चुनौती दी और अब सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें गैरकानूनी (US Supreme Court Trump tariffs) करार दे दिया है। ट्रंप का दावा था कि ये टैरिफ अमेरिकी उद्योग को मजबूत करेंगे, लेकिन छोटे बिजनेस ने इसे अपने अस्तित्व पर हमला बताया।

अमेरिका के इन छोटे कारोबारियों ने दी थी चुनौती

मामला तब गरमाया जब ट्रंप ने लगभग हर आयातित सामान पर भारी टैरिफ लगा दिए। वर्जीनिया के शार्लोट्सविल में माइक्रोकिट्स चलाने वाले इलेक्ट्रिकल इंजीनियर डेविड लेवी ने कहा कि

इन टैरिफ की वजह से उन्हें अपने उत्पाद महंगे करने पड़े, उत्पादन घटाना पड़ा और नया प्रोडक्ट लॉन्च रोकना पड़ा। उनका कहना था कि जब कीमतें बार-बार बदलती हैं तो कारोबार की योजना बनाना मुश्किल हो जाता है।"

सिर्फ लेवी ही नहीं, वर्मोंट की महिला साइक्लिंग गियर कंपनी, इलिनॉय की दो शैक्षणिक खिलौना कंपनियां और न्यूयॉर्क के वाइन आयातक विक्टर ओवेन श्वार्ट्ज भी इस कानूनी लड़ाई में शामिल हुए। श्वार्ट्ज ने कहा कि टैरिफ ने छोटे कारोबारों के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया।

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'कोर्ट तय करे कि हम जिंदा रहें या नहीं'

700 से ज्यादा छोटे व्यवसायों ने अदालत (small businesses challenge Trump tariffs) में कहा कि यह फैसला तय करेगा कि वे जिंदा रह पाएंगे या नहीं। यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी एसोसिएशन ने भी कोर्ट में ट्रंप टैरिफ का विरोध किया और कहा कि इससे व्यापारिक माहौल में कोविड महामारी से भी ज्यादा अनिश्चितता आई।

हालांकि कुछ उद्योगपति ट्रंप के समर्थन में भी थे। मार्लिन स्टील के सीईओ ड्रू ग्रीनब्लैट ने कहा कि टैरिफ से अमेरिकी स्टील उद्योग को बराबरी का मौका मिला।

लेकिन कई अर्थशास्त्रियों, जिनमें अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के माइकल स्ट्रेन और पूर्व फेड चेयर बेन बर्नान्के शामिल हैं, ने अदालत में दलील दी कि व्यापार घाटा और मैन्युफैक्चरिंग नौकरियों में गिरावट का सीधा संबंध नहीं है।

फेडरल रिजर्व के अनुमान के मुताबिक, पिछले ट्रेड वॉर में जितनी नौकरियां बनीं, उससे कहीं ज्यादा खत्म हुईं।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने ट्रंप टैरिफ को गैरकानूनी ठहरा दिया है। यह फैसला न सिर्फ ट्रंप की आर्थिक नीति पर सवाल है, बल्कि यह भी दिखाता है कि छोटे कारोबारियों ने कानूनी लड़ाई में अपने ही राष्ट्रपति को चुनौती देकर बड़ी जीत हासिल की।

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