वाशिगटन। विदेश सचिव रंजन मथाई ने अमेरिका से भेदभावपूर्ण कार्रवाई खत्म करने पर जोर देते हुए कहा है कि भारतीय आईटी कंपनियों ने पिछले पाच साल में अमेरिका को कर के रूप में 15 अरब डालर का भुगतान किया है।

विदेश सचिव के रूप में पहली बार द्विपक्षीय यात्रा पर गए मथाई ने उम्मीद जताई कि अमेरिका में आर्थिक चुनौतियों के कारण संरक्षणवाद को बढ़ावा नहीं मिलेगा और भारतीय आईटी उद्योग की चिंताओं को दूर किया जाएगा।

ऐसा समझा जाता है कि उन्होंने वाणिज्य विभाग के अधिकारियों के साथ सोमवार को बैठक के दौरान इन मुद्दों के उठाया। सेंटर फार स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में अपने संबोधन के दौरान मथाई ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि मौजूदा आर्थिक चुनौतियों के कारण अमेरिका संरक्षणवाद को बढ़ावा नहीं देगा और भारतीय आईटी उद्योग की चिंताओं का तत्काल समाधान किया जाएगा।

उन्होंने नासकाम के अनुमान का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय उद्योग ने अमेरिका में 100,000 लोगों को रोगजार दिया हुआ है जो छह साल पहले 20,000 था। इतना ही नहीं अप्रत्यक्ष रूप से 200,000 अन्य लोगों को रोजगार मिला हुआ है और कुछ अमेरिकी उद्योगों की प्रतिस्पर्धा में भी इजाफा हुआ है।

मथाई ने कहा कि अधिकतर भारतीय कंपनियां विकास केंद्र स्थापित कर रही हैं। भारतीय आईटी उद्योग पिछले पाच साल में कर के रूप में 15 अरब डालर का योगदान दिया है। कड़े वीजा नियम द्वारा इन चीजों को खत्म नहीं किया जाना चाहिए।

भारतीय विदेश सचिव ने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध प्रगाढ़ हैं, ऐसे में भारत तथा अमेरिका के बीच एक दूसरे की नीति तथा नियामकीय मुद्दों के कारण चिंता का होना कोई बड़ी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि इन मसलों के हल के लिए हमारे पास द्विपक्षीय व्यवस्था है। हमें द्विपक्षीय निवेश समझौते को जल्दी तार्किक परिणति तक पहुंचाना चाहिए लेकिन इसके बाद की चीजों पर भी हमें ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह रेखाकित किया कि अमेरिका दुनिया का एकमात्र ऐसा विकसित देश है जिसके साथ भारत ने व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता नहीं किया और न ही उसे आगे बढ़ा रहा है।

मथाई ने कहा कि हमें न केवल व्यापार बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए बल्कि शोध की ताकत का इस्तेमाल कर अपनी अर्थव्यवस्थाओं को 21वीं सदी में दुनिया की प्रमुख शक्ति बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। साथ ही दुनिया में गरीबों की जरूरतों को पूरा करने के साथ स्च्च्छ ऊर्जा खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य तथा शिक्षा जैसी चुनौतियों का भी हल निकालना चाहिए।

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