भारत या चीन... अमेरिका से कौन खरीदता है सबसे ज्यादा क्रूड ऑयल, कौन सा देश नंबर-1? टॉप-10 देशों की पूरी लिस्ट
Top 10 countries buying US oil: अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल उत्पादक और निर्यातक बन गया है। मध्य ...और पढ़ें

अमेरिका से कौन खरीदता है सबसे ज्यादा क्रूड ऑयल, टॉप-10 देशों में भारत और चीन कहां? होश उड़ा देगी ये लिस्ट
HighLights
अमेरिका बना दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक
मध्य पूर्व तनाव से अमेरिकी तेल बाजार मजबूत
भारत अमेरिकी कच्चे तेल का सातवां बड़ा खरीदार
नई दिल्ली| क्या आप जानते हैं कि अमेरिका से सबसे ज्यादा कच्चा तेल कौन सा देश खरीदता (US crude oil exports top countries 2025) है और टॉप-10 देशों की लिस्ट में भारत (top 10 countries buying US oil) किस नंबर पर है?
दअरसल, मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच यह सवाल और भी ज्यादा अहम हो गया है। क्योंकि, ईरान को लेकर बढ़ते तनाव ने ग्लोबल ऑयल मार्केट को हिला दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz strait tension impact on oil prices) में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कच्चे तेल की सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है।
हालात ऐसे बने हुए हैं कि अगर सप्लाई में बड़ी रुकावट आती है तो दुनिया की कुल तेल सप्लाई का करीब 25 फीसदी यानी लगभग 25 मिलियन बैरल तेल प्रभावित हो सकता है।
इसके अलावा ईरान समर्थित हूती और अन्य विद्रोही गुटों ने अमेरिका और इजरायल पर हमले की धमकी दी है। इससे बाब-अल-मांदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भी खतरा मंडरा रहा है। अगर यहां भी जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो वैश्विक तेल बाजार में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
युद्ध के बीच मजबूत खिलाड़ी बनकर उभरा अमेरिका
इसी बीच अमेरिका तेल बाजार में सबसे मजबूत खिलाड़ी बनकर उभरा है। अमेरिका आज दुनिया का सबसे बड़ा कच्चे तेल का उत्पादक है और कई देशों को बड़े पैमाने पर तेल निर्यात करता है।
अमेरिका से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले टॉप-10 देश
| क्रमांक | तेल खरीदने वाले देश | 2025 में कितना तेल खरीदा? |
| 1 | नीदरलैंड्स | 419 मिलियन बैरल (10.7%) |
| 2 | मेक्सिको | 398 मिलियन बैरल (10.2%) |
| 3 | कनाडा | 324 मिलियन बैरल (8.3%) |
| 4 | साउथ कोरिया | 257 मिलियन बैरल (6.6%) |
| 5 | जापान | 247 मिलियन बैरल (6.3%) |
| 6 | चीन | 238 मिलियन बैरल (6.1%) |
| 7 | भारत | 221 मिलियन बैरल (5.7%) |
| 8 | ब्राज़ील | 133 मिलियन बैरल (3.4%) |
| 9 | यूनाइटेड किंगडम | 124 मिलियन बैरल (3.2%) |
| 10 | स्पेन | 95 मिलियन बैरल (2.4%) |
अमेरिकी एनर्जी इन्फोर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के मुताबिक, 2025 में अमेरिका ने कुल मिलाकर 3.9 अरब बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात किए।
कैसे बना अमेरिका तेल का सुपरपावर ?
अमेरिका 2020 से लगातार हर तिमाही में नेट ऑयल एक्सपोर्टर बना हुआ है। यानी वह जितना तेल आयात करता है, उससे ज्यादा निर्यात करता है। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह शेल गैस और शेल ऑयल टेक्नोलॉजी है। 2008 के बाद से अमेरिका के तेल निर्यात में करीब 800 फीसदी की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जबकि इसी अवधि में उसका तेल आयात करीब 38 फीसदी घट गया।
कभी ऐसा भी दौर था जब 2006 में अमेरिका हर तिमाही करीब 400 मिलियन बैरल तेल का नेट आयात करता था। लेकिन 2025 तक स्थिति पूरी तरह बदल गई और अब वह हर तिमाही करीब 100 मिलियन बैरल कच्चे तेल का नेट एक्सपोर्टर बन चुका है।
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तेल महंगा तो अमेरिका की कमाई और ज्यादा
ईरान संकट से पहले अमेरिका का WTI क्रूड करीब 55 डॉलर प्रति बैरल था। उस कीमत पर अमेरिकी तेल कंपनियां सालाना करीब 62 अरब डॉलर का कैश जेनरेट कर रही थीं। लेकिन अब तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी है।
अगर कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं तो अमेरिकी तेल कंपनियों का सालाना फ्री कैश फ्लो 163 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यानी मौजूदा हालात में अमेरिकी तेल कंपनियों को करीब 100 अरब डॉलर का अतिरिक्त फायदा हो सकता है।
इसलिए कहा जा रहा है कि वैश्विक तनाव के बीच भी अमेरिका का तेल कारोबार पहले से ज्यादा मजबूत हो गया है।
