मुंबई, एजेंसी। गेहूं की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार इसके आयात पर लगने वाले शुल्क को हटा सकती है। अभी गेहूं के आयात पर 40 प्रतिशत आयात शुल्क लगता है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार कारोबारियों के लिए गेहूं स्टाक की सीमा भी तय कर सकती है। भारत सरकार ने कम उत्पादन को देखते हुए मई में गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद घरेलू स्तर पर गेहूं के मूल्य में लगातार वृद्धि हो रही है।

समाचार एजेंसी रायटर की रिपोर्ट के मुताबिक अभी अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं का मूल्य घरेलू बाजार से ज्यादा बना हुआ है। इससे कारोबारियों को विदेश से गेहूं खरीदना अव्यवहारिक है। यदि सरकार आयात शुल्क हटा देती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मूल्य में कमी आती है तो कारोबारी विदेश से गेहूं आयात कर सकते हैं। खासतौर पर त्योहारी सीजन के दौरान गेहूं आयात किया जा सकता है। तब ज्यादा मांग के कारण मूल्य बढ़ जाता है।

बीते सप्ताह उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा था कि हम गेहूं के मूल्य को कम करने के लिए सभी संभावित विकल्प तलाश रहे हैं। इस बातचीत के दौरान अधिकारी ने कहा था कि गेहूं के मूल्य में कमी के लिए 40 प्रतिशत आयात शुल्क को हटाया जा सकता है। बीते सप्ताह घरेलू बाजार में गेहूं का मूल्य 2,400 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। मई के मुकाबले इसमें 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

मुंबई के एक कारोबारी के मुताबिक, गेहूं का घरेलू मूल्य अभी भी वैश्विक मूल्य के मुकाबले एक तिहाई कम है। कारोबार ने कहा कि भारतीय गेहूं अभी भी पूरी दुनिया में सबसे सस्ता है। भारत दुनिया में गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। इससे पहले भारत ने वित्त वर्ष 2017-18 में गेहूं का आयात किया था।

दिल्ली के एक कारोबारी का कहना है कि सरकार के पास इस साल बाजार में हस्तक्षेप करने के लिए सीमित विकल्प हैं क्योंकि इसकी खरीद 57 प्रतिशत गिरकर 1.88 करोड़ टन रह गई है। नई फसल आने में अभी नौ महीनों का समय है। ऐसे में गेहूं की किसी भी कमी से बचने के लिए सरकार को तब तक स्टाक का उपयोग बहुत सावधानी से करना होगा। 

Edited By: Krishna Bihari Singh