नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट में संशोधनों को अपनी मंजूरी दे दी। इसके बाद कई राज्यों में चल रहे सहकारी बैंक भी केंद्रीय बैंक के रेगुलेशन के अंतर्गत आ गए हैं। ऐसा किसी भी तरह के कदाचार को रोकने और बेहतर रेगुलेशन को सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को इस बात की जानकारी दी।

Co-operative Bank में पांच लाख करोड़ रुपये की जमा 

जावड़ेकर ने कहा, ''वर्तमान में 1,540 को-ऑपरेटिव बैंक है। इनमें 8.6 करोड़ लोगों के पांच लाख करोड़ रुपये जमा हैं। संशोधन के बाद ये बैंक भी RBI के रेगुलेशन के अंदर आ जाएंगे।''

हालांकि, जावड़ेकर ने स्पष्ट किया कि इन बैंकों की प्रशासनिक भूमिका का प्रबंधन को-ऑपरेटिव रजिस्ट्रार्स द्वारा किया जाएगा। कैबिनेट की मीटिंग के बाद उन्होंने जानकारी दी कि इन बैंकों की ऑडिटिंग भी आरबीआई के नियमों के मुताबिक की जाएगी। 

PMC घोटाले के बाद नियमों में संशोधन 

पिछले साल Punjab and Maharashtra Co-operative (PMC) Bank से जुड़े घोटाले के सामने आने के बाद ये संशोधन किए गए हैं। न्यूज एजेंसी पीटीआइ ने आरबीआई के आंकड़ों के हवाले से हाल में एक रिपोर्ट में कहा था कि पिछले पांच वित्त वर्ष में शहरी सहकारी बैंक से जुड़े धोखाधड़ी के 220 करोड़ रुपये के करीब 1,000 मामले सामने आए। 

CEO की नियुक्ति के लिए RBI से अनुमति लेना जरूरी 

इन संशोधनों के बाद बैंक में प्रबंधन स्तर की नियुक्ति के लिए RBI द्वारा तय अहर्ताओं का पालन अनिवार्य होगा। इसके अलावा सीईओ की नियुक्ति के लिए पहले आरबीआई से अनुमति प्राप्त करनी होगी। 

बैंकों में जमा राशि पर गारंटी बढ़ी

बैंकों में विश्वास बहाली की कोशिशों के तहत हाल में वित्त वर्ष 2020-21 के केंद्रीय बजट में बैंकों में जमा राशि पर गारंटी की राशि को एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख करने की घोषणा हुई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करते हुए इसका ऐलान किया था। 

Posted By: Ankit Kumar

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