नई दिल्ली [जयप्रकाश रंजन]। महंगाई और आर्थिक सुस्ती का खामियाजा भुगत रही आम जनता को आगामी बजट से कुछ राहत मिल सकती है। वित्त मंत्रालय बचत योजनाओं को आकर्षक बनाने के लिए कई घोषणाएं कर सकता है। इसके तहत जीवन बीमा पॉलिसियों पर कुछ कर राहत मिलने के आसार हैं। वहीं, नई पेंशन योजना पर सरकार मेहरबानी दिखा सकती है। ऐसा करने का सरकार पर राजनीतिक दबाव भी है और काफी हद तक आर्थिक मजबूरी भी।

पेट्रोल-डीजल कीमतों में वृद्धि, रसोई गैस सब्सिडी घटाने जैसे जनविरोधी कदमों की भरपाई के लिए सरकार के पास आगामी आम चुनाव से पहले संभवत: यह आखिरी मौका होगा। पिछले दिनों कांग्रेस पार्टी के साथ वित्त मंत्री की बैठक में यह साफ संकेत दिया गया कि उन्हें मध्यम वर्ग को खुश करने के लिए कुछ करना होगा। इसके अलावा आर्थिक हालात भी इस बात की मांग कर रहे हैं कि बचत को बढ़ाने के उपाय किए जाएं।

एंजेल ब्रोकिंग के एमडी ललित ठक्कर का कहना है, बचत दर को बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। पिछले कुछ वर्षो में सकल घरेलू उत्पाद [जीडीपी] की तुलना में घरेलू बचत की दर 37 से घटकर 30 फीसद पर आ चुकी है। चालू वित्त वर्ष की सुस्ती को देखते हुए यह स्तर और घट सकता है। महंगाई के साथ ही महंगे कर्ज की वजह से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। अगर हालात ऐसे ही रहे तो इसका असर निवेश पर पड़ेगा। इसलिए वित्त मंत्री को इक्विटी, बैंक जमा वगैरह के प्रति आकर्षण बढ़ाने के लिए हरसंभव कोशिश करनी चाहिए।

शायद यही वजह है कि बीमा क्षेत्र के जानकार भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि वित्त मंत्री जीवन बीमा पॉलिसियों पर भी अलग से रियायत देंगे। खास तौर पर जीवन बीमा के लिए देय पहले प्रीमियम को सेवा शुल्क से मुक्त रखने की पूरी संभावना है। इसकी मांग बजट से पहले जीवन बीमा कंपनियों ने वित्त मंत्री के साथ अपनी बैठक में उठाई थी। इसके अलावा पेंशन उत्पादों को आयकर छूट देने के लिए एक अलग वर्ग बनाने के भी संकेत हैं। अभी पेंशन उत्पादों को एक लाख रुपये की कर छूट सीमा के तहत ही शामिल किया जाता है। इस कदम को नई पेंशन स्कीम [एनपीएस] को लोकप्रिय बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद एनपीएस के प्रति आम जनता का कोई रुझान देखने को नहीं मिला है।

पेंशन स्कीम को विशेष कर राहत देने की मांग उद्योग जगत भी कर रहा है। पिछले हफ्ते एचडीएफसी ने भारत में पेंशन स्कीमों पर जारी एक अध्ययन में कहा था कि मौजूदा औद्योगिक मंदी की वजह से यहां के लोगों को बुढ़ापे के लिए पैसा जमा करने में दिक्कत आ रही है। 29 फीसद लोगों ने कहा है कि उनकी तो बुढ़ापे के लिए बचत ही नहीं है। इन कदमों से बचत बढ़ने के साथ ही देश में पेंशन व बीमा क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे सुस्ती से निबटने में मदद मिलेगी।

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