नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान भारत की विकास दर छह फीसद रहेगी और अगले वित्त वर्ष यह वृद्धि दर 6.2 फीसद रहने की संभावना है। यह बात संयुक्त राष्ट्र ने बुधवार को वैश्विक अर्थव्यवस्था और संभावनाओं पर वर्ष 2023 की रिपोर्ट पर कही है।

ब्याज दरों में लगातार वृद्धि से खतरा: यूएन

यूएन ने भारत में ब्याज दरों में हुई वृद्धि को भारतीय इकोनॉमी के समक्ष एक बड़ी चुनौती के तौर पर चिन्हित किया है। वजह यह बताया है कि भारत में हाल के वर्षों में कर्ज का स्तर काफी बढ़ा है।ऐसे में ब्याज दरों के बढ़ने से देश की इकोनॉमी पर बोझ पड़ेगा। भारत में रोजगार की स्थिति को लेकर इस रिपोर्ट में सीधे तौर पर कोई चिंता नहीं जताई गई है। लेकिन युवाओं, खास तौर पर युवा महिलाओं में बेरोजगारी को चिंताजनक बताया है।

भारत में बेरोजगारी की दर पिछले कुछ वर्षों के सबसे न्यूनतम स्तर पर

रिपोर्ट में कहा है कि भारत में बेरोजगारी की दर पिछले कुछ वर्षों के सबसे न्यूनतम स्तर पर है। वर्ष 2022 में शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादा नौकरियों के आने की बात कही गई है। सनद रहे कि हाल ही में यूएन की एक रिपोर्ट ने बताया था कि कोविड के बाद भारत में रोजगार में महिलाओं की हिस्सेदारी कम हुई है। वैश्विक स्तर पर मंदी के खतरे को भी भारत की विकास दर पर विपरीत असर पड़ने की बात कही है।

भारत के अलावा ये देश भारी बोझ के तले दबाए

रिपोर्ट में भारत के अलावा ब्राजील, नाइजीरिया व पाकिस्तान का भी नाम लिया है जो भारी बोझ के तले दबे हैं और इन देशों को बढ़ते ब्याज दरों का खामियाजा भुगतने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। ये सारे देश अपने कुल राजस्व का कम से कम 20 फीसद कर्ज चुकाने में कर रहे हैं। भारत के बारे में कहा गया है कि वह वर्ष 2020 के मुकाबले अभी 8.7 फीसद ज्यादा ब्याज चुका रहा है। महंगाई को लेकर यूएन कहता है कि यह ज्यादा नहीं बढ़ेगी और संभवत: अगले वित्त वर्ष 5.5 फीसद के स्तर पर रहेगी।

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Edited By: Ashisha Singh Rajput

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