115 साल पुराने दिग्गज TVS ग्रुप में बंटवारे को लेकर लड़ाई, भाई-बहन में हिस्से को लेकर विवाद
वेणु श्रीनिवासन के परिवार में संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर मतभेद सामने आए हैं, जिसमें उनकी बेटी लक्ष्मी वेणु ...और पढ़ें

वेणु श्रीनिवासन के परिवार में संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर मतभेद सामने आए।
HighLights
वेणु श्रीनिवासन के बच्चों में संपत्ति बंटवारे पर मतभेद।
लक्ष्मी वेणु और वेणु सुदर्शन के बीच मालिकाना हक का विवाद।
2024 का MoU केवल ब्रांड उपयोग पर, वित्तीय समझौता नहीं।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| वेणु श्रीनिवासन के परिवार में मालिकाना हक को लेकर आपसी मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं, जिसमें उनके बच्चे लक्ष्मी वेणु और वेणु सुदर्शन आमने-सामने हैं। श्रीनिवासन, अयंगर के पोते हैं और बाइक बनाने वाली कंपनी TVS मोटर्स और उससे जुड़ी कंपनियों के चेयरमैन हैं। 2020 में हुए एक समझौते के तहत, 115 साल पुराने TVS इंडस्ट्रियल ग्रुप को इसके फाउंडर T.V. सुंदरम अयंगर के बेटों के बीच बांट दिया गया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामले की जानकारी रखने वाले एक एग्जीक्यूटिव के मुताबिक, श्रीनिवासन के परिवार (जिसे VS ब्रांच कहा जाता है) के अगली पीढ़ी उनकी बेटी लक्ष्मी अपने छोटे भाई सुदर्शन "सही समझौता" चाहते हैं। उनके बीच TVS ब्रांड को बांटने पर दो साल पहले सहमति बनी थी, लेकिन अब कुछ सालों बाद विवाद खुलकर सामने आ रहा है।
एग्जीक्यूटिव ने कहा, "TVS परिवार में 2020 में संयुक्त परिवार का बंटवारा हुआ था। इसके बाद VS ब्रांच TVS होल्डिंग्स, TVS मोटर्स, TVS क्रेडिट्स और SCL जैसी कंपनियों को कंट्रोल करती है।" "देश के कानून के तहत लक्ष्मी को सुदर्शन के बराबर ही अधिकार हैं।"
एग्जीक्यूटिव ने बताया कि VS ब्रांच के अंदर कोई बंटवारा या समझौता नहीं हुआ है और लक्ष्मी की मां मल्लिका श्रीनिवासन बातचीत के जरिए "सौहार्दपूर्ण समझौता" कराने की कोशिश कर रही हैं।
20 मार्च 2024 के मेमोरैंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर श्रीनिवासन, मल्लिका, लक्ष्मी और सुदर्शन ने साइन किए थे। इसमें बताया गया था कि कौन किस बिज़नेस के लिए TVS नाम का इस्तेमाल कर सकता है। एग्जीक्यूटिव ने कहा कि इसमें यह तय नहीं किया गया था कि किसका मालिकाना हक किस पर है।
एग्जीक्यूटिव ने कहा, "2024 का MoU सिर्फ ब्रांड अधिकारों के इस्तेमाल और नॉन-कम्पलीट (प्रतिस्पर्धा न करने) के बारे में है, इसमें कोई वित्तीय समझौता शामिल नहीं है।" "बिजनेस चलाने से किसी को खास मालिकाना हक नहीं मिलता और न ही परिवार के दूसरे सदस्यों के वित्तीय अधिकार खत्म होते हैं।"
स्पष्टता की रही कमी
एग्जीक्यूटिव ने बताया कि लक्ष्मी ने बार-बार जानकारी, पारदर्शिता और बातचीत की मांग की है। "दुख की बात है कि इन कोशिशों के जवाब में मदद करने वाली बातचीत के बजाय खामोशी और कभी-कभी धमकियां ही मिली हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पढ़े-लिखे और आधुनिक भारत में भी जेंडर के आधार पर भेदभाव इतना ज़्यादा है कि एक बेटी को कानून के मुताबिक उसका हक़ी हिस्सा नहीं मिल पाता।"
लक्ष्मी के करीबी एग्जीक्यूटिव ने बताया कि हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत बेटी को भी बेटे के बराबर ही अधिकार मिलते हैं।
हालांकि, एग्जीक्यूटिव को उम्मीद है कि इस मामले में परिवार की मुखिया मल्लिका श्रीनिवासन अपने दोनों बच्चों के बीच मतभेदों को आपसी सहमति से सुलझाने की कोशिश करेंगी।
