नई दिल्ली (पीटीआई)। पिछली तारीख से (रेट्रोस्पेक्टिव) टैक्स वसूली का सामना करने वाली पहली कंपनी ब्रिटेन की केयर्न एनर्जी ने फायदा उठाने के लिए जो खेल किया उसकी परतें खुलने लगी हैं। भारतीय संपत्तियों को ट्रांसफर करने के लिए उसने महज छह महीनों के अंदर सहायक कंपनियों का मकड़जाल बना डाला। 10,247 करोड़ रुपये की टैक्स मांग इसी एसेट ट्रांसफर से जुड़ा है।

जानकारी के अनुसार, इस ब्रिटिश कंपनी की 2006 तक नौ भारतीय सब्सिडियरी के जरिये भारत में संपत्तियां थीं। इसमें राजस्थान ऑयल फील्ड शामिल है। उसके बाद कई स्तरों पर सहायक कंपनियां बनाई गईं और भारतीय संपत्तियों का ट्रांसफर किया गया। कर विभाग ने बताया कि कंपनी ने पुनर्गठन के जरिये पूंजीगत लाभ कमाया। इसके कारण टैक्स डिमांड बनी।

इस बारे में जब केयर्न एनर्जी से संपर्क किया गया तो कंपनी के प्रवक्ता ने पुनर्गठन को जायज ठहराया। साथ ही कहा कि उसके पास भारतीय कंपनी को ब्रिटेन के शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने का विकल्प था। यह और बात है कि उसने ब्रिटेन के बाजारों के ऊपर भारत को चुना। कंपनी ने जो स्ट्रक्चर बनाया था, उसकी जानकारी बाजार नियामक सेबी, तब मौजूद विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआइपीबी) और रिजर्व बैंक को 2006 में पारदर्शी तरीके से दी थी।

केयर्न ने सबसे पहले 26 जून, 2006 को केयर्न यूके होल्डिंग (सीयूएचएल) का गठन किया और उसमें भारतीय संपत्ति ट्रांसफर की। इसके बदले में उसे 30 जून, 2006 को सीयूएचएल के 22.14 करोड़ शेयर मिले। उसे एक सितंबर, 2006 को 2.97 करोड़ पौंड के कर्ज की बिक्री के लिए भी 2.97 करोड़ और शेयर मिले। फिर तीन अगस्त, 2006 को सीयूएचएल के पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी के रूप में केयर्न इंडिया होल्डिंग (सीआइएचएल) का गठन चैनल आइलैंड्स के जर्सी में किया गया। चैनल आइलैंड्स को टैक्स चोरी का पनाहगाह माना जाता है। इसके बाद सीआइएचएल में भारतीय संपत्ति ट्रांसफर की गई, जिसने बदले में सात अगस्त, 2006 को 22.14 करोड़ शेयर सीयूएचएल, यूके को जारी किए।

सीयूएचएल ने 2.98 करोड़ पौंड का कर्ज सीआइएचएल को बेचा। इसके बदले में जर्सी की कंपनी ने 2.97 करोड़ शेयर और जारी किए। ऐसे में सीयूएचएल, यूके ने सीआइएचएल के 25.12 करोड़ शेयरों का अधिग्रहण किया। यह शेयर एक पौंड के भाव पर लिया गया। फिर उसके बाद सीयूएचएल, यूके ने 12 अक्टूबर, 2006 को सीआइएचएल के 4.14 करोड़ शेयर नवगठित ब्रिटिश कंपनी केयर्न इंडिया को बेचे। इसके एवज में इस कंपनी ने ब्रिटिश कंपनी को 5,037 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। नवंबर और दिसंबर 2006 के बीच इस प्रकार के तीन और शेयर ट्रांसफर हुए। चारों ट्रांजैक्शन को मिलाकर सीआइएचएल के 25.12 करोड़ शेयर केयर्न इंडिया को 26,681 करोड़ रुपये में बेचे गए। आयकर विभाग के दस्तावेजों के अनुसार, जिस कीमत पर कर्ज को ट्रांसफर किया गया, उसके आधार पर अधिग्रहण की अनुमानित लागत 25.12 करोड़ पौंड (2,178 करोड़ रुपये) रही। लिहाजा, अनुमान के हिसाब से सीयूएचएल को 24,503 करोड़ रुपये (26,681 करोड़ रुपये के लाभ में से 2,178 करोड़ रुपये की अधिग्रहण कीमत को घटाए जाने के बाद) का कैपिटल गेंस हुआ।

Posted By: Praveen Dwivedi

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