जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष के पहले पांच-छह महीनों के दौरान कर संग्रह के मोर्चे पर प्रदर्शन तो सरकार की उम्मीदों से बेहतर है, लेकिन इसके बावजूद सरकार के खजाने की सेहत बहुत अच्छी नहीं दिख रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि पिछले तीन महीनों में जिस तरह से उर्वरक और खाद्य सब्सिडी में वृद्धि की तस्वीर बनी है उसे देखते हुए राजकोषीय घाटे के बजटीय अनुमान से बढ़ने की उम्मीद मजबूत हुई है।

राजकोषीय घाटा 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने एक बार फिर भरोसा जताया है कि राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 6.4 प्रतिशत ही रहेगा, लेकिन आर्थिक विषयों पर शोध करने वाली एजेंसियों का कहना है कि अगर सरकार के खर्च में कटौती नहीं की गई तो यह 6.6 प्रतिशत तक हो सकता है। सरकार के लिए यह राहत की बात है कि उक्त दो सब्सिडियों के अलावा दूसरे खर्चे काफी हद तक काबू में दिख रहे हैं।

35.46 प्रतिशत ज्यादा रहा प्रत्यक्ष कर संग्रह

वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि 8 सितंबर, 2022 तक प्रत्यक्ष कर संग्रह 6.48 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 35.46 प्रतिशत ज्यादा है। निजी शोध एजेंसी कोटक की तरफ से लोक वित्त पर जारी ताजी रिपोर्ट में इसे उम्मीद से बेहतर माना गया है। रिपोर्ट के मुताबिक चालू वित्त वर्ष के दौरान शुद्ध कर संग्रह में अतिरिक्त 1.12 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि की सूरत बन रही है। हालांकि इसके बावजूद सरकार की राजकोषीय स्थिति दबाव में होगी। वजह यह है कि सरकार पर तकरीबन 2.6 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ सब्सिडी की वजह से पड़ता दिख रहा है।

मुफ्त खाद्यान्न योजना से पड़ रहा है 45 हजार करोड़ रुपये का बोझ

हाल ही में केंद्र सरकार ने पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 80 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न देने की योजना की अवधि तीन महीनों के लिए और बढ़ा दी है, जिससे 45 हजार करोड़ रुपये का बोझ पड़ रहा है। इसके अलावा अन्य दूसरे खाद्यान्न सब्सिडी में 80 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था करनी पड़ रही है और उर्वरक सब्सिडी के मद में 1.15 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है।

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Edited By: Sonu Gupta

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