नई दिल्ली, पीटीआइ। अगले वित्त वर्ष (2020-21) के लिए टैक्स रेवेन्यू में 12 फीसद की वृद्धि का लक्ष्य मुश्किल भले लग रहा हो, लेकिन राजस्व सचिव अजय भूषण पांडेय यह लक्ष्य हासिल करने को लेकर आश्वस्त हैं। उनका कहना है कि 10 परसेंट के नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ वाली अर्थव्यवस्था के लिए यह लक्ष्य बहुत मुश्किल नहीं है। देश की विकास दर इस समय 11 साल के निचले स्तर पर है। इसके अलावा पिछले साल कॉरपोरेट टैक्स में हुई कटौती के कारण सरकार अच्छे-खासे अंतर से चालू वित्त वर्ष के लिए तय अपने टैक्स रेवेन्यू के लक्ष्य से चूकती नजर आ रही है। लगातार तीसरे साल राजकोषीय घाटा भी लक्ष्य से ज्यादा रहने का अनुमान है। 

इन परिस्थितियों के बावजूद राजस्व सचिव 2020-21 के लिए तय कर संग्रह के लक्ष्य को लेकर आश्वस्त हैं। एक साक्षात्कार में पांडेय ने कहा, ‘2020-21 में नॉमिनल ग्रोथ 10 फीसद रहने का अनुमान जताया गया है। ऐसे में कर राजस्व में 12 फीसद की वृद्धि आसानी से हो सकती है।’ अगले वित्त वर्ष के लिए बजट में 24.23 लाख करोड़ रुपये के कर राजस्व का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह चालू वित्त वर्ष के 21.63 लाख करोड़ रुपये से 12 फीसद ज्यादा है। 

अगले वित्त वर्ष में निजी आयकर से 6.38 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। यह चालू वित्त वर्ष के 5.59 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य से 14.13 फीसद ज्यादा है। कॉरपोरेट टैक्स रेवेन्यू चालू वित्त वर्ष के 6.10 लाख करोड़ रुपये से 11.63 फीसद बढ़ाकर 6.81 लाख करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है।

चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने टैक्स रेवेन्यू का लक्ष्य 24.61 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 21.63 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। पांडेय ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के लिए टैक्स रेवेन्यू का लक्ष्य 12 फीसद नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ के अनुमान के आधार पर तय किया गया था। हालांकि इस दौरान नॉमिनल ग्रोथ 7.5 फीसद रही। 

इस स्थिति को समझाते हुए पांडेय ने कहा, ‘इस साल हमने टैक्स रेवेन्यू में चार फीसद की वृद्धि दर्ज की। कॉरपोरेट टैक्स में कटौती के जरिये हमने सात फीसद की वृद्धि दर के बराबर का टैक्स रेवेन्यू छोड़ दिया। इस तरह टैक्स रेवेन्यू के मामले में हमारी प्रभावी ग्रोथ 11 फीसद रही। यदि 7.5 फीसद के नॉमिनल ग्रोथ पर हम टैक्स रेवेन्यू में 11 फीसद की वृद्धि हासिल कर सकते हैं, तो 10 फीसद की नॉमिनल ग्रोथ पर टैक्स रेवेन्यू में 12 फीसद की वृद्धि मुश्किल नहीं है।’

उल्लेखनीय है कि सरकार ने सितंबर, 2019 में मौजूदा कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स की दर को 30 फीसद से घटाकर 22 फीसद कर दिया था। इसके अलावा, पहली अक्टूबर, 2019 से 31 मार्च, 2023 के बीच शुरू होने वाली नई कंपनियों के लिए दर को 25 फीसद से घटाकर 15 फीसद कर दिया गया था। 

इस कदम से स्वच्छ भारत सेस एवं शिक्षा सेस जोड़ने के बाद मौजूदा कंपनियों के लिए टैक्स की प्रभावी दर 34.94 से घटकर 25.17 फीसद और नई कंपनियों के लिए 29.12 फीसद से घटकर 17.01 फीसद रह गई है। इससे राजकोष पर सालाना 1.45 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ा है। कई राज्यों ने केंद्र पर कंपनसेशन के जल्द भुगतान का दबाव बढ़ाया है।

राज्यों के लिए कंपनसेशन की राशि जल्द होगी जारी

केंद्र सरकार जीएसटी से राज्यों को होने वाले रेवेन्यू लॉस की भरपाई के लिए जल्द ही 35,000 करोड़ रुपये की कंपनसेशन राशि जारी करेगी। जीएसटी कानून के तहत केंद्र ने राज्यों को तब तक कंपनसेशन का भरोसा दिया है, जब तक उनका राजस्व 2015-16 के आधार वर्ष से 14 फीसद ज्यादा नहीं हो जाता। पिछले वर्ष जुलाई तक केंद्र व राज्यों के बीच कंपनसेशन भुगतान को लेकर कोई टकराव नहीं हुआ था। इसके बाद कंपनसेशन सेस के मद में पर्याप्त राजस्व नहीं आने से केंद्र ने इस मद में भुगतान रोक दिया था। 

दिसंबर, 2019 में केंद्र ने अगस्त और सितंबर के कंपनसेशन के लिए 35,298 करोड़ रुपये की राशि जारी की थी। एक अधिकारी के मुताबिक, अक्टूबर-नवंबर के लिए जल्द ही 35,000 करोड़ रुपये की राशि फिर केंद्र की तरफ से जारी की जाएगी।

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस