नई दिल्ली, पीटीआइ। वैश्विक संकेतों से इस सप्ताह घरेलू शेयर बाजारों की दिशा निर्धारित होगी। विश्लेषकों के मुताबिक मासिक डेरिवेटिव एक्सपायरी और उच्च मूल्यांकन के बीच शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। BSE Sensex ने शुक्रवार को 60,000 अंक का स्तर छू कर नया कीर्तिमान स्थापित किया था। BSE Sensex ने महज आठ महीने में 50,000 अंक से 60,000 अंक तक का स्तर छू लिया। सेंसेक्स ने 31 साल से थोड़े अधिक समय में एक हजार अंक से 60,000 अंक तक का सफर पूरा किया है।

स्वास्तिका इंवेस्टमार्ट के प्रमुख (शोध) संतोष मीणा ने कहा, ''भारतीय बुल मार्केट में तेजी का सिलसिला बदस्तूर जारी है और सेंसेक्स ने सभी चिंताओं को पीछे छोड़ते हुए 60,000 अंक के नए मील को पत्थर को छू लिया है। हम 2003-2007 की तरह क्लासिक बुल मार्केट में हैं और इसके अगले दो-तीन वर्ष तक जारी रहने की उम्मीद है।''

हालांकि, पिछले कुछ दिन में जिस तरह की तेजी शेयर बाजारों में दर्ज की गई है, उसको लेकर उन्होंने निवेशकों को चेताया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में थोड़े समय के लिए करेक्शन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के एमडी और सीईओ मोतीलाल ओसवाल ने भी इसी तरह की राय जाहिर की। उन्होंने कहा, ''बहुत अधिक वैल्यूएशन को देखते हुए कोई भी व्यक्ति अगले कुछ दिनों के लिए होने वाले उतार-चढ़ाव को नजरंदाज नहीं कर सकता है। हालांकि, हमें इस बात की उम्मीद है कि आर्थिक गतिविधियों में सुधार और कंपनियों के कमाई में रिकवरी से आने वाले समय में तेजी का सिलसिला बना रह सकता है।''

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रमुख (शोध) विनोद नायर ने कहा कि इस सप्ताह की शुरुआत में कोई महत्वपूर्ण घरेलू आर्थिक आंकड़ा नहीं आने वाला है। इस वजह से शेयर बाजारों की चाल वैश्विक बाजारों के रुख पर निर्भर करेगी। हालांकि, मैन्यूफैक्चरिंग पीएमआई का आंकड़ा शुक्रवार को जारी किया जाएगा।

उन्होंने कहा, ''इस सप्ताह सितंबर महीने का मैन्यूफैक्चरिंग पीएमआई इंडेक्स जारी किया जाएगा। इस आंकड़े से इस महीने के कारोबारी गतिविधियों को लेकर एक दृष्टिकोण मिलेगा।''

सैमको रिसर्च के एक नोट के मुताबिक पिछले सप्ताह जो उतार-चढ़ाव देखने को मिला था, वह मासिक एक्सपायरी के चलते अगले सप्ताह में भी देखने को मिल सकता है।

Edited By: Ankit Kumar