नई दिल्ली, किशोर ओस्तवाल। NSE Nifty ने इस सप्ताह 13,000 अंक के स्तर को लगभग छू लिया और 12,880 अंक के आसपास बंद हुआ। यह अब तक का सबसे उच्च स्तर है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह बढ़त रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में गिरावट के बावजूद दर्ज की गई। हमने अपने पूर्व की कुछ रिपोर्ट्स में इस बात का जिक्र किया था कि ITC, SBI, Infosys और L&T जैसे स्टॉक्स में बढ़त से  Nifty को मजबूती मिलेगी। इस तरह देखा जाए तो हाल के दिनों में Nifty में जो 1300 अंक की बढ़त देखने को मिली है, वह रिलायंस के बगैर रही। निफ्टी पर रिलायंस इंडस्ट्रीज का वेटेज 16 फीसद के आसपास है और यह करीब 1,900 अंक के स्तर पर बंद हुआ। यह रिलायंस इंडस्ट्रीज के अब तक के उच्चतम स्तर से 15-20 फीसद नीचे है। आइए जानते हैं कि आम निवेशकों के लिए इसके क्या निहितार्थ हैंः

बेहद आसान शब्दों में इसे समझने की कोशिश करते हैं। Dow केवल 5 स्टॉक्स की मदद से 30,000 के स्तर पर पहुंच चुका है। वहीं, Nifty केवल 12 स्टॉक के दम पर करीब 13,000 अंक के स्तर पर है, जबकि Nifty में 50 स्टॉक को शामिल किया जाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो हम बिना किसी व्यापक बढ़त के 13,000 अंक के स्तर पर पहुंच गए हैं। अब इसमें और व्यापक बढ़त देखने को मिलेगी या प्रमुख स्टॉक्स में बिकवाली इसे नीचे ले आएंगे या एक बुल रन के समापन के लिए ठीक-ठाक करेक्शन देखने को मिलेगा। आने वाले सेटलमेंट में अब केवल चार दिन शेष हैं। ऑप्शन बाजार से शेयर बाजार की दिशा तय होती है और इस वजह से बहुत संभव है कि गुरुवार तक बाजार की दिशा में कोई बदलाव ना हो।  

अब रिलायंस इंडस्ट्रीज की भूमिका काफी अहम हो गई है। पिछले कुछ दिनों में जिस स्टॉक ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया है, वो अगले चार दिन में बाजार की दिशा तय करने वाला बन सकता है। पिछले दो-तीन माह में साप्ताहिक और मासिक एक्सपायरी के समय मुकेश अंबानी के स्वास्थ्य को लेकर अलग-अलग तरह की अफवाहें सामने आती रही हैं। बहुत संभव है कि कुछ लोगों ने जानबूझकर यह अफवाह फैलायी हो। CCI के Futures और RIL डील को मंजूरी देने के साथ ही अगले चार दिन में RIL के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल सकती है। अगर ऐसा होता है तो अगले चार दिन में निफ्टी 13,300 अंक के स्तर तक पहुंच जाएगा।

निफ्टी पर बढ़त के व्यापक होने के लिए जरूरी है कि मिड कैप और स्मॉल कैप शेयर अच्छा प्रदर्शन करें। मिड कैप और स्मॉल कैप 2017 के अपने सर्वोच्च स्तर से काफी पीछे हैं। इसी बीच एक और पहलू है कि कुछ स्टॉक्स 25 गुना तक की तेजी के बावजूद विनियामकों की चंगुल से बाहर रहे जबकि कुछ स्टॉक को 5-10 फीसद के उतार-चढ़ाव पर भी जुर्माना उठाना पड़ा। यह मुख्य बात यह है कि सभी तरह के स्टॉक बड़ी कंपनियां द्वारा मैनेज किया जाता है और उनके पास भीतर की सारी खबर होती है। वे यह फैसला करते हैं कि बाजार कब और किस दिशा में आगे बढ़ेंगे। हमारा आकलन है कि जनवरी, 2021 में नए नियमनों के प्रभावी होने से पूर्व दिसंबर में मिड कैप और स्मॉल कैप आकर्षण के मुख्य केंद्र होंगे। 

हम पहले ही कह चुके हैं कि बाजार के ट्रेंड सेटलमेंट से सेटलमेंट पर निर्भर करते हैं। इस पर विदेशी मुद्रा प्रवाह का कोई खास असर नहीं देखने को मिलता है। हालांकि, पिछले तीन-चार दिन के ट्रेंड देखें तो आने वाला समय संभावनाओं से भरा हुआ नजर आ रहा है। हालांकि, हमारा मानना है कि यहां से निवेशकों को दूसरी तरह की रणनीति अपनानी होगी। इनमें कुछ बातें अहम हैंः केवल ऐसे स्टॉक्स खरीदिए जो अभी तक अपने उच्चतम वैल्यू पर नहीं पहुंचे हैं, फ्यूचर और ऑप्शन पोजिशन से बचिए, चार सत्र में स्टॉक्स की खरीदारी करिए, आपको 20 फीसद तक की गिरावट को ध्यान में रखना होगा। वहीं, आपको यह मानकर निवेश करना होगा कि निफ्टी गिरकर 12,000 के स्तर पर आ सकता है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर आपको निवेश करना होगा।  

दूसरी तरफ इस समय कारोबारियों को विभिन्न तरह की घटनाओं को ध्यान में रखना होगा। हमने विनिवेश योजना से पहले BPCL को 350 रुपये पर खरीदने को कहा था और 408 रुपये पर बेच दिए। किसी भी बाजार में सही स्टॉक चुना जा सकता है, अगर आप तार्किक तरीके से इस बात को ध्यान में रखते हैं कि किसी भी शेयर को कब तक के लिए होल्ड किया जाना चाहिए। ऐसे में किसी भी ट्रेंड को समझना उतना मुश्किल होता है।  

(लेखक सीएनआई रिसर्च लिमिटेड के सीएमडी हैं। प्रकाशित विचार लेखक के निजी हैं।)

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