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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 27, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

स्पाइसजेट ने सरकार को सौंपी पुनरुद्धार योजना

By Jagran News NetworkEdited By:
Published: Sat, 27 Dec 2014 09:10 AM (IST)Updated: Sat, 27 Dec 2014 09:28 AM (IST)

बजट एयरलाइन स्पाइसजेट के सीओओ संजीव कपूर ने पूर्व प्रमोटर अजय सिंह के साथ शुक्रवार को विमानन मंत्रलय में सचिव ...और पढ़ें

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। बजट एयरलाइन स्पाइसजेट के सीओओ संजीव कपूर ने पूर्व प्रमोटर अजय सिंह के साथ शुक्रवार को विमानन मंत्रलय में सचिव वी सोमसुंदरन तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर पुनरुद्धार योजना पेश की।

इसमें अजय का अमेरिकी कंपनी जेपी मॉर्गन चेज के साथ मिलकर स्पाइसजेट में 1,250 करोड़ रुपये (20 करोड़ डॉलर) की इक्विटी लगाने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही मुंबई शेयर बाजार में स्पाइसजेट के शेयरों में 10 फीसद तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

मुलाकात के दौरान संजीव और अजय ने विमानन मंत्रलय के अधिकारियों को बताया कि एयरलाइन ने अपने कर्मचारियों को नवंबर के वेतन का भुगतान कर दिया है। नकदी संकट से जूझ रही यह बजट एयरलाइन अब तक अपने कर्मचारियों को नवंबर की तनख्वाह नहीं दे पाई थी। इसके मुख्य प्रमोटर और सन समूह के मुखिया कलानिथि मारन का कहना था कि वह स्पाइसजेट में और पैसा लगाने की स्थिति में नहीं है।

कपूर ने बैठक को अत्यंत सार्थक बताया। उन्होंने पुनरुद्धार पैकेज का ब्योरा देने से तो इन्कार किया, मगर कहा कि स्पाइसजेट के अजय समेत कई शुभचिंतक हैं। उन्होंने माना कि स्पाइसजेट पर बैंकों का 300 करोड़ रुपये कर्ज है। स्पष्ट किया कि तेल कंपनियों का अब कोई बकाया नहीं है।

स्पाइसजेट इस समय 18 चालू बोइंग विमानों के साथ रोजाना 230 उड़ानें संचालित कर रही है। सूत्रों के अनुसार अजय सिंह के अलावा जेपी मॉर्गन द्वारा प्रबंधित फंड एक महीने के भीतर स्पाइसजेट में कलानिथि मारन की इक्विटी खरीद सकते हैं। इससे पहले स्पाइसजेट को निवेशकों से 17 करोड़ रुपये हासिल हुए थे। इसी पैसे का उपयोग तेल कंपनियों का बकाया अदा करने में किया गया।

विमानन मंत्रालय के अनुसार स्पाइसजेट पर 24 नवंबर से 10 दिसंबर के दौरान विदेशी और देशी आपूर्तिकर्ताओं की कुल देनदारियां 990 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,230 करोड़ रुपये पर पहुंच गई थीं। इनमें लीज पर विमान देने वाली तथा एमआरओ सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियों का 742 करोड़ तथा बैंकों का 300 करोड़ रुपये का बकाया शामिल है।

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