जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। चीन में कोरोना कारण परेशानी में आ रहे भारत निर्यातकों के लिए सरकार की तरफ से जल्द ही रोडमैप तैयार हो सकता है। छोटे निर्यातकों को बैंकों के रीपेमेंट में रियायत दी जा सकती है। वहीं उन्हें पोर्ट पर भी माल की आवाजाही के लिए तत्काल क्लीयरेंस की सुविधा मिल सकती है। कोरोना के प्रभाव के आकलन के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को निर्यातकों की बैठक बुलाई थी। चीन से आने वाले कच्चे माल की कमी से निर्यातकों के ऑर्डर की डिलिवरी में देरी की आशंका है। वहीं कच्चे माल की कमी होने से निर्यातकों की लागत भी बढ़ सकती है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस (फियो) के अध्यक्ष शरद कुमार सराफ ने बताया कि वित्त मंत्री के साथ बैठक में कोरोना के कारण भारतीय व्यापार पर पड़ने वाले असर की व्यापक चर्चा की गई। इस दौरान वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि फियो की तरफ से वित्त मंत्री के समक्ष निर्यातकों की ओर से कई मांगें कई रखी गईं। इनमें छोटे निर्यातकों को बैंक के रीपेमेंट में रियायत देने के साथ उन्हें जीएसटी विभाग द्वारा रिस्की जोन में नहीं रखे जाने की मांग की गई।

उन्होंने बताया कि निर्यातकों की तरफ से बैंकों को पेमेंट में देरी से उन्हें एनपीए श्रेणी में रख दिया जाता है। वहीं, पोर्ट पर तत्काल क्लीयरेंस की सुविधा की भी मांग की गई ताकि माल की आवाजाही में कोई विलंब नहीं हो। सराफ ने बताया कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार की तरफ से निर्यातकों की मांगें मान ली जाएंगी।दूसरी तरफ टेक्सटाइल मंत्री स्मृति ने भी चीन में कोरोना वायरस से उत्पन्न स्थिति एवं उसके फलस्वरूप व्यापार की नई संभावनाओं पर एक सिमपोजियम का आयोजन किया।

सिमपोजियम में टेक्सटाइल मंत्रालय के सचिव के साथ वाणिज्य एवं वस्त्र मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों, वस्त्र मंत्रालय के अधीन सभी निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्षों के साथ साथ बाइंग एजेंट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भाग लिया। कार्पेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन सिद्ध नाथ सिंह, कालीन उद्योग की संभावनाओं पर एक प्रेजेन्टेशन दिया तथा सरकार को कालीन उद्योग की समस्या तथा कालीन उद्योग के लिए नई संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

 

Posted By: Nitesh

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस