नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। भारत की अर्थव्यवस्था में ट्रेड वार का प्रभाव धीरे-धीरे कम हो रहा है। वहीं इसी बीच उसे अपने घरेलू उपभोग पर भरोसा है ताकि वो इस साल भी सबसे तेज अर्थव्यवस्था की राह पर बना रहे।

बढ़ती ब्याज दरों के बावजूद बैंक कर्ज की मांग जुलाई तिमाही में ठोस रही है। विदेशी निवेश की रफ्तार सुस्त रही है जिसने भुगतान संतुलन के जोखिम को रेखांकित किया है। अन्य जोखिमों की बात करें तो उनमें तेल की बढ़ती कीमतें, सख्त होती वैश्विक परिस्थितियां और कर संग्रह में आ रही गिरावट प्रमुख हैं जो कि बजट लक्ष्य को प्राप्त करने की संभावना को कम कर रहे हैं। इन सबों के बावजूद समझिए कैसे भारत सबसे तेज अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।

बिजनेस गतिविधियां: भारत का मुख्य सर्विस इंडेक्स जुलाई महीने में 21 महीनों के उच्चतम स्तर पर रहा, ताजा पर्चेजिंग मैनेजर इंडेक्स ने यही स्थिति बयां की थी। वहीं मैन्युफैक्चरिंग में लगातार इजाफा देखने को मिला है, हालांकि सुस्त रफ्तार से। इन दोनों ने ही कंपोजिट इंडेक्स को अक्टूबर 2016 के बाद के उच्चतम स्तर पर ला दिया है। नए ऑर्डर्स में इजाफे से आशावाद का जन्म होता है क्योंकि इससे व्यवसायों को और अधिक उत्पादन करने का विश्वास मिलता है।

निर्यात: बीते साल के मुकाबले जुलाई महीने में निर्यात 14.3 फीसद बढ़ा है। हालांकि यह इसके पिछले महीने के मुकाबले 18 फीसद कम रहा। अर्थशास्त्री और नीत निर्माता आशान्वित हैं कि रुपये में आई हालिया गिरावट टेक्सटाइल सेक्टर को रिकवरी में मदद करेगी।

उपभोक्ता गतिविधियां: सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के आंकड़े बताते हैं कि जुलाई महीने में इंडस्ट्री ने ज्यादा व्हीकल्स का प्रोडक्शन किया। इसमें कमर्शियल व्हीकल और टू-व्हीलर में तेज इजाफा देखने को मिला। हालिया बिक्री आंकड़ों में 8 फीसद की तेजी देखने को मिली है।

Posted By: Praveen Dwivedi

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