नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ब्याज दरों में राहत दिए जाने के बाद शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। आरबीआई के रेपो रेट में कटौती किए जाने के फैसले से बाजार बेअसर दिखा और गुरुवार को बंबई स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क इंडेक्स, सेंसेक्स 192.40 अंक टूटकर 38,684.72 पर बंद हुआ , वहीं नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 45.95 अंकों की गिरावट के साथ 11,598 पर बंद हुआ। निफ्टी में 23 शेयर हरे निशान में जबकि 27 शेयर लाल निशान में बंद हुए।

सेंसेक्स सुबह 58.63 अंकों की मजबूती के साथ 38,935.75 पर जबकि निफ्टी 16.25 अंकों की बढ़त के साथ 11,660.20 पर खुला था।

बैंकिंग शेयरों की पिटाई: ब्याज दरों में कटौती किए जाने का उल्टा असर बैंकिंग शेयरों पर देखने को मिला। एसएंडपी बीएसई का बैंकिंग इंडेक्स 226.60 अंकों की गिरावट के साथ 33,621.40 पर बंद हुआ। वहीं रेट सेंसेटिव स्टॉक्स में से ऑटो शेयर तेजी के साथ बंद हुए।

बीएसई का ऑटो इंडेक्स करीब 100 से अधिक अंकों की तेजी के साथ 19,280.67 पर बंद हुआ। वहीं रियल्टी स्टॉक मामूली तेजी के साथ बंद हुए। बीएसई के रियल्टी इंडेक्स में गोदरेज प्रॉपर्टीज, प्रेस्टिज, सनटेक और ओबेरॉय रियल्टी के शेयर मजबूती के साथ बंद हुए।

आरबीआई ने लगातार दूसरी बार रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती करते हुए इसे घटाकर 6 फीसद कर दिया है। इसके साथ ही नीतिगत रुख को पहले की ही तरह ''न्यूट्रल'' रखा गया है।

गौरतलब है कि इससे पिछली बैठक में भी आरबीआई ने उम्मीद के उलट जाते हुए रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती की थी। बैंक की घोषणा के बाद सेंसेक्स जहां 160 अंक फिसलते हुए 38,716.67 पर जा पहुंचा, वहीं निफ्टी करीब 50 अंकों की गिरावट के साथ 11,597 के स्तर पर जा पहुंचा।

RBI ने घटाया वृद्धि दर का अनुमान: नए वित्त वर्ष की पहली नीतिगत समीक्षा बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 2019-20 के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को घटा दिया है। अर्थव्यवस्था में सुस्ती की संभावना को देखते हुए आरबीआई ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 7.2 फीसद जीडीपी का अनुमान लगाया है, जो पहले 7.4 फीसद था।

तीन दिनों तक चली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया, '2019-20 के लिए जीडीपी अनुमान 7.2 फीसद रखा गया है। वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही में इसके 6.8 फीसद से 7.1 फीसद के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि दूसरी छमाही में इसके 7.3 फीसद से 7.4 फीसद के बीच रहने का अनुमान है।'

आरबीआई ने कहा, 'उत्पादन और कैपिटल गुड्स के आयात में आई गिरावट घरेलू निवेश की गतिविधियों में कमजोरी का संकेत दे रहे हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुस्ती भारत के एक्सपोर्ट पर असर डाल सकती है।'

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Posted By: Abhishek Parashar

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