नई दिल्ली, पीटीआइ। खाद्य तेल व्यापार संगठन (SEA) ने सोमवार को सरकार से रिफाइंड पाम ऑयल के आयात पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही एसईए ने सरकार से सूरजमुखी के तेल पर टैरिफ लगाने और नेपाल, बांग्लादेश व श्रीलंका से आने वाले अवैध आयात पर भी नजर रखने की मांग की है। एसईए ने स्थानीय प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के हितों को ध्यान में रखते हुए ये मांगें सरकार के सामने रखी हैं। द सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने खाद्य सचिव सुधांशु पांडे के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में ये मुद्दे उठाए हैं।

एसईए ने एक बयान में कहा, 'हमने सरकार को मलेशिया और इंडोनेशिया से आयात होने वाले रिफाइंड पाम ऑयल पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता के बारे में बताया है। क्योंकि इससे घरेलू शोधन क्षमता बेकार पड़ी है, जो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेक इन इंडिया की अवधारणा के विपरीत है।' एसईए ने आगे कहा, 'यह एक रहस्य बना हुआ है कि मेक इन इंडिया की अवधारणा का मजाक बनाने वाली कुछ इष्ट कंपनियों को आयात लाइसेंस कैसे जारी किये जाते हैं।'

संगठन ने अपने बयान में आगे कहा, 'इंडस्ट्री के पास इस समय हर महीने 15 लाख टन से अधिक कच्चे पाम ऑयल को रिफाइन करने और घरेलू मांग को पूरा करने के लिए आरबीडी पामोलियन/रिफाइंड पाम ऑयल की आपूर्ती करने की क्षमता है। संगठन ने सूरजमुखी तेल के आयात की जांच के लिए इस पर मासिक टैरिफ मुल्य लगाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जैसा कि पाम और सोया ऑयल के मामले में है।'

अवैध आयात की जांच के लिए एसईए ने सरकार से नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका से आने वाले शिपमेंट की सख्ती से निगरानी करने और उत्पाद के मूल स्रोत की जांच करने का आग्रह किया है। खाद्य तेल के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए एसईए ने सरकार को खाद्य तेल के लिए लंबें समय से लंबित राष्ट्रीय मिशन को भी शुरू करने का सुझाव दिया है। साथ ही चावल की भूसी, कपास और वृक्ष जनित तिलहन जैसे गैर-परंपरागत स्रोतों पर भी पूरा ध्यान देने का सुझाव दिया है। इसके अलावा संगठन ने पंजाब और हरियाणा में उपयुक्त प्रोत्साहन देकर उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए सरसों मिशन शुरू करने का भी सुझाव सरकार को दिया है।  

Edited By: Pawan Jayaswal