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'Anil Ambani के देश छोड़कर भागने की आशंका', सुप्रीम कोर्ट बोला- बिना अनुमति देश नहीं छोड़ सकते; जानें क्या है मामला?

By Jagran BusinessEdited By: Ankit Kumar Katiyar
Published: Wed, 04 Feb 2026 08:12 PM (IST)Updated: Wed, 04 Feb 2026 08:36 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी और एडीएजी समूह से जुड़े 40 हजार करोड़ रुपये के कथित बैंकिंग व कॉर्पोरेट धोखाधड़ी ...और पढ़ें

Anil Ambani के देश छोड़कर भागने की आशंका! CBI-ED को सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, 'निष्पक्ष जांच करो', क्या है मामला?

Anil Ambani के देश छोड़कर भागने की आशंका! CBI-ED को सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, 'निष्पक्ष जांच करो', क्या है मामला?

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एजेंसी, नई दिल्ली| सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) और अनिल अंबानी से जुड़ी कथित 40 हजार करोड़ रुपए की बैंकिंग एवं कॉरपोरेट धोखाधड़ी मामले की जांच में अकारण देरी को लेकर नाराजगी जताई। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और ईडी को निष्पक्ष और त्वरित जांच का निर्देश दिया है।

जनहित याचिका दायर करने वाले पूर्व नौकरशाह ईएएस सरमा ने अनिल अंबानी (Anil Ambani) के देश छोड़कर भागने की आशंका जताई। इस पर अंबानी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने आश्वासन दिया कि वह अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने अंबानी और एडीएजी की कंपनियों के खिलाफ चल रही जांच में हुई प्रगति पर सीबीआई और ईडी (CBI-ED) से चार सप्ताह के भीतर नई स्थिति रिपोर्ट मांगी है। पीठ ने ईडी को एडीएजी और अन्य के खिलाफ जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया।

40 हजार करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का है मामला

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि एडीएजी समूह की विभिन्न कंपनियों के माध्यम से कथित तौर पर गबन की गई कुल राशि लगभग 40 हजार करोड़ रुपए है। पीठ ने ईडी के हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि रिलायंस कम्युनिकेशंस के ऋण 40 हजार करोड़ रुपए से अधिक हैं और जांच एजेंसी ने अपराध से प्राप्त आय का आकलन 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक किया है।

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8,078 करोड़ रुपए की संपत्ति पहले ही जब्त- ED

ईडी ने बताया कि 8,078 करोड़ रुपए की संपत्ति पहले ही अस्थायी रूप से जब्त कर ली गई है। पीठ ने सीबीआई (CBI) के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि एजेंसी ने अन्य कई वित्तीय संस्थानों से शिकायतें मिलने के बावजूद भारतीय स्टेट बैंक की शिकायत के आधार पर 2025 में केवल एक प्राथमिकी दर्ज की।

सीबीआई का रवैया प्रक्रियात्मक कानून के अनुरूप नहीं लगता है। प्रत्येक बैंक ने अलग लेनदेन की शिकायत की है और इसके लिए एक अलग प्राथमिकी दर्ज होना जरूरी है।