मुंबई, आइएएनएस। देश के सबसे बड़े बैंक SBI ने वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान अपने फंसे हुए कर्ज को कम करके बताया था। यह राशि 11,932 करोड़ रुपये की है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के जोखिम आकलन रिपोर्ट में यह बात पायी गई है। केंद्रीय बैंक ने गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) के लिए बैंक की ओर से की गई प्रोविजनिंग (फंसे हुए कर्ज के बदले किये जाने वाला प्रावधान) में अंतर पाया है। SBI ने मंगलवार को इस बारे में रेगुलेटरी फाइलिंग में जानकारी दी। State Bank of India ने कहा है कि उसने आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक प्रोविजनिंग की है। इसके बाद यह निष्कर्ष निकलता है कि पिछले वित्त वर्ष में बैंक को 862 करोड़ रुपये के लाभ की जगह 6,968 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ होता। 

बैंक और RBI के आकलन में अंतर होने पर फंसे हुए कर्ज और प्रोविजन में अंतर उत्पन्न हो जाता है। इस साल अक्टूबर में बाजार नियामक सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने सार्वजनिक तौर पर कारोबार करने वाले बैंकों से तय समय के भीतर आरबीआई के आकलन और बैंकों के फंसे हुए कर्ज में अंतर के बारे में सूचित करने का निर्देश दिया था। सेबी ने एसेट क्वालिटी को सार्वजनिक करने को लेकर नियमों को कड़ा करने के लक्ष्य के साथ यह निर्देश दिया था।

इस साल अप्रैल में आरबीआई ने बैंकों को प्रोविजनिंग के डेटा में अंतर की जानकारी देने को कहा था। हालांकि इसके लिए प्रोविजनिंग से पहले लाभ में 10 फीसद से अधिक का अंतर होना चाहिए। बैंकों को अतिरिक्त NPA के रिपोर्टेड NPA से 15% अधिक होने की जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश भी दिया गया था। 

Indian Bank, Lakshmi Vilas Bank, Union Bank of India, UCO Bank और Yes Bank सहित अन्य बैंकों द्वारा भी पिछले वित्त वर्ष के एनपीए की प्रोविजनिंग और आरबीआई के आकलन में अंतर पाया गया था। 

इस साल अक्टूबर में SBI ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 3,011.73 करोड़ रुपये के शुद्ध लाभ की सूचना दी थी। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में बैंक ने 944.87 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित करने की सूचना दी थी।

Posted By: Ankit Kumar

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