नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) और बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) की वियाबिलिटी रेटिंग (व्यवहार्यता रेटिंग) को कम कर दिया है। लेकिन एजेंसी ने केनरा बैंक और बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) के साथ 'बीबीबी' दीर्घकालिक जारीकर्ता डिफॉल्ट रेटिंग की पुष्टि भी की है।

वहीं एजेंसी ने इन बैंकों के स्टेबल आउटलुक को भी बरकरार रखा है। फिच ने एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा की व्यवहार्यता रेटिंग को घटाकर क्रमश: बीबी+ और बीबी कर दिया है। एजेंसी ने ऐसा बैंकों की खराब संपत्ति गुणवत्ता एवं उनकी पूंजी स्थिति पर कमाई के नकारात्मक प्रभाव के कारण उनके कमजोर आंतरिक जोखिम प्रोफाइल का हवाला देते हुए किया है।

फिच ने यह भी कहा है कि नए एनपीए ढांचे ने खराब ऋण की पहचान को तेज कर दिया है और लंबी अवधि में इसमें सुधार होना चाहिए। गौरतलब है कि फिच ने घरेलू बैंकिंग सेक्टर का आउटलुक नकारात्मक रखा है। इसमें कहा गया, “हालांकि भारी नुकसान इस धारणा को मजबूत करता है कि अगर बैंकों को बजट में प्रस्तावित 11 अरब डॉलर से ज्यादा की पूंजी उपलब्ध नहीं करवाई जाती है तो बैंकों का पूंजीकरण कमजोर ही बना रह सकता है।”

फिच ने FY19 के लिए भारत के ग्रोथ अनुमान को बढ़ाकर 7.4 फीसद किया:

फिच रेटिंग एजेंसी ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए भारत के ग्रोथ अनुमान को 7.3 फीसद से बढ़ाकर 7.4 फीसद कर दिया है। हालांकि एजेंसी ने यह भी चेताया है कि कर्ज की लागत का बढ़ना और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल इकॉनमिक ग्रोथ के लिए जोखिम भरा है। वहीं वित्त वर्ष 2019-20 के लिए उसने भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ के 7.5 फीसद पर रहने का अनुमान लगाया है।

फिच ने अपने ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक में कहा, “हमने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए भारत के ग्रोथ अनुमान को बढ़ाकर 7.4 फीसद कर दिया है जिसके बारे में हमने मार्च में 7.3 फीसद रहने का अनुमान लगाया था। हालांकि उच्च वित्तीय लागत और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें ग्रोथ की रफ्तार पर लगाम लगा सकती हैं।”

Posted By: Praveen Dwivedi

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