मुंबई, पीटीआइ। कर्ज के बोझ तले दबी दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) के प्रशासक ने कंपनी के फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) धारकों के करीब 4,800 करोड़ रुपये के दावे मंजूर कर लिए हैं। कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया में जाने वाली पहली हाउसिंग कंपनी डीएचएफएल से यूपी पावर कॉरपोरेशन के कर्मचारियों समेत करीब 55,000 खुदरा निवेशकों ने कुल 5,200 करोड़ रुपये की मांग की है।

सूत्रों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) द्वारा नियुक्त प्रशासक और रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल आर. सुब्रमन्याकुमार ने इसमें से करीब 4,800 करोड़ रुपये के दावों को भुगतान योग्य पाया है। डीएचएफएल के वित्तीय कर्जदाताओं, परिचालन कर्जदाताओं कर्मचारियों, एफडी धारकों और अन्य कर्जदाताओं ने अब तक करीब 93,105 करोड़ रुपये की मांगें की हैं। एक बैंक अधिकारी के मुताबिक इनमें से अब तक 85,800 करोड़ रुपये की मांगों को भुगतान योग्य पाया है।

नेशनल कंपनी लॉ टिब्यूनल (एनसीएलटी) द्वार पिछले वर्ष तीन दिसंबर को दिए गए फैसले के बाद सुब्रमन्याकुमार ने एक सार्वजनिक सूचना जारी की थी। इसके माध्यम से उन्होंने कंपनी के सभी कर्जदाताओं और एफडी धारकों से 17 दिसंबर तक अपने दावे पेश करने को कहा था। नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक कंपनी के वित्तीय कर्जदाताओं ने कंपनी को दिए कर्ज के एवज में कुल 86,892.30 करोड़ रुपये का दावा किया। इसके मुकाबले परिचालन कर्जदाताओं की दावा राशि 60.76 करोड़ रुपये है।

कंपनी के वित्तीय कर्जदाताओं में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) ने अपनी और सहयोगी शाखा एसबीआइ सिंगापुर की तरफ से सबसे ज्यादा कुल 10,082.90 करोड़ रुपये का दावा किया है। हालांकि इसमें से अब तक 7,131.31 करोड़ रुपये के दावे स्वीकार किए गए हैं और 2,951.59 करोड़ रुपये के दावों का सत्यापन जारी है। एसबीआइ की एक अन्य सहयोगी एसबीआइ (मॉरीशस) ने भी 97.58 करोड़ रुपये का दावा किया है। वहीं, कंपनी के कर्मचारियों और अन्य कामगारों ने 2.01 करोड़ रुपये का दावा किया है। डिबेंचर ट्रस्टी कैटालिस्ट ट्रस्टीशिप के माध्यम से बांडधारकों ने भी डीएचएफएल से 45,550.07 करोड़ रुपये की मांग की है।

डीएचएफएल के अन्य बड़े कर्जदाताओं में बैंक ऑफ इंडिया (4,125.52 करोड़ रुपये), केनरा बैंक (2,681.81 कराड़ रुपये), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (2,378.05 करोड़ रुपये), बैंक ऑफ बड़ौदा (2,078.9 करोड़ रुपये) और नेशनल हाउसिंग बैंक (2,433.79 करोड़ रुपये) के अलावा कई अन्य शामिल हैं। दूसरी तरफ वित्तीय और परिचालन कर्जदाताओं के अलावा एचएम टावर प्राइवेट लिमिटेड, मैन रियल्टी, मेरिनो शेल्टर्स व नीलकमल रियल्टर्स टावर ने भी 930.55 करोड़ रुपये के दावे किए हैं।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष दो दिसंबर को हाउसिंग फाइनेंस क्षेत्र की इस बड़ी कंपनी की इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया को मंजूरी दे दी गई थी। उसके बाद पिछले सप्ताह कंपनी के कर्जदाताओं की पहली बैठक हुई। इसमें सुब्रमन्याकुमार ने कर्जदाताओं को अब तक मिले दावों की जानकारी दी। आरबीआइ ने पिछले वर्ष 20 नवंबर को कंपनी के निदेशक बोर्ड को निलंबित कर दिया और सुब्रमन्याकुमार को प्रशासक नियुक्त किया था।

ये बड़े कर्जदाता

डीएचएफएल के अन्य बड़े कर्जदाताओं में बैंक ऑफ इंडिया (4,125.52 करोड़ रुपये), केनरा बैंक (2,681.81 कराड़ रुपये), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (2,378.05 करोड़ रुपये), बैंक ऑफ बड़ौदा (2,078.9 करोड़ रुपये) और नेशनल हाउसिंग बैंक (2,433.79 करोड़ रुपये) के अलावा कई अन्य शामिल हैं। दूसरी तरफ वित्तीय और परिचालन कर्जदाताओं के अलावा एचएम टावर प्राइवेट लिमिटेड, मैन रियल्टी, मेरिनो शेल्टर्स व नीलकमल रियल्टर्स टावर ने भी 930.55 करोड़ रुपये के दावे किए हैं।

Posted By: Pawan Jayaswal

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