अंबानी को एक झटके में मिलेंगे ₹12,500 करोड़! 3 साल बाद Reliance ने चला बड़ा दांव, क्या है मास्टरप्लान?
रिलायंस इंडस्ट्रीज घरेलू बाजार से 5 साल के रुपया बॉन्ड के जरिए ₹12,500 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। यह ...और पढ़ें

अंबानी को एक झटके में मिलेंगे ₹12,500 करोड़!
HighLights
रिलायंस ₹12,500 करोड़ के घरेलू रुपया बॉन्ड जारी करेगी।
5 साल के बॉन्ड पर निवेशकों को 7.47% ब्याज मिलेगा।
यह अंबानी की डॉलर के महंगे कर्ज से बचने की रणनीति है।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: एशिया के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance industries) एक बार फिर घरेलू बाजार में बड़ी रकम जुटाने की तैयारी में है। बता दें कि रिलायंस इंडस्ट्रीज 5 साल की अवधि वाले घरेलू बॉन्ड्स (Rupee Bonds) के जरिए बाजार से ₹12,500 करोड़ जुटाने जा रही है। यह लगभग 3 साल में रिलायंस का पहला घरेलू रुपया बॉन्ड इश्यू है। इससे पहले नवंबर 2023 में कंपनी ने ₹20,000 करोड़ जुटाए थे।
₹12,500 करोड़ के बॉन्ड पर रिलायंस की दांव?
रिलायंस ने इस फंडरेजिंग को बहुत ही स्मार्ट तरीके से तैयार किया है। इस बॉन्ड इश्यू के जरिए बड़े निवेशक, म्यूचुअल फंड्स और इंश्योरेंस कंपनियां अपना पैसा रिलायंस में निवेश करेंगी। डील की स्ट्रक्चर की बात करें तो, कंपनी का लक्ष्य 5 साल की अवधि वाले इस बॉन्ड के जरिए कुल ₹12,500 करोड़ की रकम जुटाना है, जिसमें ₹10,000 करोड़ का बेस इश्यू और ₹2500 करोड़ का ग्रीन शू ऑप्शन शामिल है। निवेशकों को इस पर 7.47% का शानदार सालाना ब्याज (कूपन रेट) ऑफर किया जा रहा है।
इस इश्यू के लिए बिडिंग की प्रक्रिया 18 सितंबर 2026 वाले हफ्ते में शुरू होने जा रही है। वहीं, इस पूरी मेगा डील को अरेंज कराने की जिम्मेदारी प्रमुख रूप से एक्सिस बैंक (Axis bank), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank), यश (YES Bank) और एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) को सौंपी गई है।
इस बड़ी डील से LIC क्यों है दूर?
सुत्रों के मुताबिक, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) रिलायंस के इस बॉन्ड इश्यू में बड़ा निवेशक नहीं है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं पहला इस बॉन्ड की मैच्योरिटी अवधि (5 साल) LIC के नजरिए से छोटी है और दूसरा, बाजार के बैंकों के पास इस समय निवेश करने के लिए पहले से ही भारी मात्रा में लिक्विडिटी मौजूद है।
बैंकों के पास कहां से आया भारी-भरकम फंड?
रिलायंस की यह मेगा डील ऐसे समय में हो रही है, जब भारतीय बैंकों ने रिजर्व बैंक RBI की विशेष स्वैप सुविधा (FCNR-B) के जरिए रिकॉर्ड विदेशी फंड जुटाया है। 31 अगस्त तक बैंको ने इस स्कीम के जरिए $127.3 अरब की भारी भरकम रकम जुटाई है। विशेष योजनाओं के तहत कुल विदेशी आवक $136.4 अरब तक पहुंच गई है। केवल ICICI बैंक ने ही FCNR(B) डिपॉजिट से 17.88 अरब डॉलर जुटाए हैं। इसके अलावा बैंक ने जुलाई-अगस्त के दौरान 3.55 अरब डॉलर के बॉन्ड भी जारी किए थे।
रिलायंस के पास पैसों की कमी नहीं, फिर भी उधार क्यों?
बहुत से लोगों के मन में यह सवाल आ सकता है कि जिस कंपनी के पास खुद ₹2.46 लाख करोड़ से ज्यादा का कैश (Cash Reserve) मौजूद है, उसे ₹12,500 करोड़ का कर्ज लेने की क्या जरूरत पड़ गई? इसके पीछे मुकेश अंबानी की बेहद शानदार वित्तीय रणनीति (Financial Strategy) काम कर रही है। बता दें कि पिछले कुछ समय से रिलायंस डॉलर में विदेशों से उधार ले रही थीं, क्योंकि वहां कर्ज सस्ता था। लेकिन अब अमेरिका ट्रेजरी यील्ड बढ़ने और डॉलर की हेजिंग (करेंसी के उतार-चढ़ाव से बचने) का खर्च महंगा हो गया है। इसके विपरीत, भारत में 5 साल के सरकारी बॉन्ड पर यील्ड काफी गिरी है।
रिलायंस को 5 साल के लिए भारत में ही महज 7.47% की ब्याज दर पर पैसा मिल रहा है, जो कि मौजूदा टॉप रेटेड (AAA) कॉर्पोरेट बॉन्ड के औसत (7.87%) से भी सस्ता है। मजबूत कंपनियां हमेशा अपना पुराना और महंगा कर्ज चुकाने के लिए ऐसे समय पर सस्ता उधार उठाती हैं (इसे रीफाइनेंसिंग कहते हैं)।
