नई दिल्ली, पीटीआइ। डिजिटल उधारी देने वाले प्लेटफार्मों की तरफ से अत्यधिक ब्याज लेने और कर्ज वसूली के अनैतिक तौर-तरीकों से उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए आरबीआइ का संशोधित दिशानिर्देश गुरुवार से लागू हो जाएगा। आरबीआइ के नए मानकों के तहत कर्ज के वितरण और उसकी वसूली की समूची प्रक्रिया कर्जदार के बैंक खातों और विनियमित संस्थानों (बैंक और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) जैसी इकाइयों के बीच ही संचालित की जा सकती है। इस दौरान कर्ज देने वाले प्लेटफार्म के किसी भी खाते का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

ग्राहकों के साथ खराब व्यवहार करने की मिल रही थी शिकायत

आरबीआइ ने कहा, 'कर्ज देने की प्रक्रिया में उधार देने वाले प्लेटफार्म को देय किसी भी शुल्क एवं अधिभार का भुगतान सीधे बैंक और एनबीएफसी करेगा ना कि उधार लेने वाला।' मालूम हो कि आनलाइन कर्ज देने वाले प्लेटफार्मों की तरफ से बहुत अधिक दर से ब्याज लेने और कर्ज की वसूली के लिए ग्राहकों के साथ खराब व्यवहार करने की कई शिकायतें मिलने के बाद आरबीआइ ने अगस्त में पहली बार दिशानिर्देश जारी किए थे। ये निर्देश नए कर्ज लेने वाले मौजूदा उपभोक्ताओं के साथ नए ग्राहकों के लिए भी लागू होंगे।

उधारी के अनैतिक तौर-तरीकों पर लगोगा लगाम

एंड्रोमीडा लोन्स के कार्यकारी चेयरमैन वी स्वामीनाथन ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद डिजिटल कर्ज लेने की दर बढ़ने से इस तरह की व्यवस्था लागू करनी वक्त की जरूरत हो गई थी। वहीं डिजिटैप के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी नागीन कोम्मू ने इसे ऋण परिवेश के लिए एक अहम घटना बताते हुए कहा कि इससे उधारी के अनैतिक तौर-तरीकों पर लगाम लगाने और निजी जानकारी की गोपनीयता को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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Edited By: Sonu Gupta

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