नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। तकनीक के सहारे पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था को चुनौती दे रहीं फिनटेक कंपनियां संभवत: अभी सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। पिछले हफ्ते आरबीआइ ने प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (पीपीआइ) लाइसेंस की आड़ में लोन देने वाली फिनटेक कंपनियों पर नकेल कसी है। साथ ही आने वाले दिनों में तकनीक आधारित सभी तरह की वित्तीय कंपनियों (फिनटेक) के लिए कायदे-कानून सख्त बनाए जाने का संकेत दिया है। इस बारे में आरबीआइ की तरफ से डिजिटल लैंडिंग (मोबाइल एप या वेबसाइट के जरिये लोन देने की व्यवस्था) से जुड़े नियम बनाने के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जो फिनटेक के भविष्य पर फैसला करेगी।

अभी तक मिले संकेत बताते हैं कि अगर कोई भी तकनीक कंपनी वित्तीय लेन-देन से जुड़ा कारोबार करती है, तो उसे बैंकिंग से जुड़ा लाइसेंस भी लेना होगा। आरबीआइ समिति की बैठक की जानकारी रखने वाले एक सूत्र के मुताबिक, किसी वित्तीय कंपनी को सिर्फ इसलिए खुला नहीं छोड़ा जा सकता कि वह अत्याधुनिक तकनीक के आधार पर सेवाएं दे रही हैं।

केंद्रीय बैंक, बैंकिंग या वित्तीय क्षेत्र में हो रहे तकनीकी विकास के खिलाफ नहीं है, लेकिन एक नियामक के तौर पर अपनी जिम्मेदारी से हट नहीं सकता। ग्राहकों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है, जिसके साथ समझौता नहीं किया जा सकता। जिस काम को करने के लिए दूसरे बैंकों को कई तरह के प्रावधानों का पालन करना पड़ता है, उसे बगैर आरबीआइ को सूचना दिए करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

पिछले हफ्ते लगाई थी रोक

आरबीआइ ने पिछले हफ्ते पीपीआइ की तरफ से जारी होने वाले भुगतान का‌र्ड्स के जरिये परोक्ष तौर पर कर्ज वितरण पर रोक लगा दी थी। हाल के दिनों में बहुत ही आसानी से कर्ज देने वाली इस तरह की कई पीपीआइ कंपनियां सामने आई हैं, जो किसी न किसी पंजीकृत एनबीएफसी से संबंधित होती हैं। इन्हें मुख्य तौर पर ग्राहकों को ऐसे वित्तीय का‌र्ड्स जारी करने की इजाजत है, जिसके लिए भुगतान वो पहले ले चुकी हैं। यानी अगर कोई ग्राहक 1000 रुपये देता है, तो उसके बदले एक पेमेंट कार्ड उसे जारी किया जाता है। लेकिन, आरबीआइ को यह सूचना प्राप्त हुई है कि कुछ कंपनियों ने कार्ड की सीमा से ज्यादा निकासी की सहूलियत देनी शुरू कर दी है। इसी कारण आरबीआइ ने सख्ती दिखाई है।

कंपनियां बोलीं- वितरित कर्ज फंसने का डर

पेमेंट सिस्टम से जुड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने पिछले मंगलवार को आरबीआइ से कहा था कि अचानक प्रतिबंध लगने से उनकी तरफ से वितरित कर्ज की राशि फंसने का खतरा पैदा हो गया है। माना जा रहा है कि इस तरह के एक करोड़ कार्ड अभी तक वितरित किए गए हैं। आरबीआइ का यह भी कहना है कि एनबीएफसी स्वयं किसी दूसरे बैंक से फंड लेती हैं, जो इन कार्ड कंपनियों को बतौर कर्ज फंड मुहैया कराती हैं। लेकिन जब एक कर्ज को फिर से कर्ज के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा, तो उसके वापस नहीं होने की सूरत में व्यवस्थागत दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। इस तरह की फिनटेक कंपनियों के कार्ड की काफी मांग है, क्योंकि ये बहुत ही आसानी से और मामूली जांच-पड़ताल पर ही कर्ज मुहैया करा देती हैं। बैंकों से कर्ज लेने में समय लगता है।

Edited By: Sarveshwar Pathak