RBI गवर्नर की बड़ी चेतावनी: अगला आर्थिक संकट 'साइबर अटैक' या जियोपॉलिटिकल झटके से आ सकता है
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि अगला वित्तीय संकट बैंकों के बजाय भू-राजनीतिक घटनाओं, साइबर हमलों या तकनीकी खराबी ...और पढ़ें

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर संजय मल्होत्रा।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शनिवार को कहा कि अगला फाइनेंशियल संकट बैंकों या फाइनेंशियल सेक्टर के बजाय किसी जियोपॉलिटिकल घटना, साइबर हमले या टेक्नोलॉजी की खराबी से शुरू हो सकता है। उन्होंने आपस में जुड़े नए तरह के जोखिमों से निपटने के लिए पूरे सिस्टम को और मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
मल्होत्रा ने पांचवें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में भाषण देते हुए कहा, "जोखिम अब बाहरी, सीमा-पार और आपस में जुड़े हुए होते जा रहे हैं।" "सिस्टम की मज़बूती बढ़ाने के लिए, हमें निर्भरता और संकट फैलने के रास्तों के नेटवर्क को बेहतर ढंग से समझने और रिस्क मैनेजमेंट में 'सिनारियो एनालिसिस' (संभावित स्थितियों का विश्लेषण) को मुख्य आधार बनाने की कोशिश करनी चाहिए।"
उन्होंने कहा, "फाइनेंशियल स्टेबिलिटी का मतलब अपरिहार्य झटकों को रोकना नहीं है।" "इसका मतलब है उन झटकों का सामना करने और उनके असर को बढ़ने से रोकने के लिए सिस्टम की मज़बूती बढ़ाना।"
मल्होत्रा ने कहा कि यह मजबूती सिर्फ बैंकों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसमें नॉन-बैंक फाइनेंशियल इंटरमीडियरी, फाइनेंशियल मार्केट, पेमेंट सिस्टम, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर, जरूरी थर्ड पार्टी और सीमा-पार फाइनेंशियल नेटवर्क भी शामिल होने चाहिए।
उन्होंने कहा, "एक मजबूत बैंकिंग सिस्टम जरूरी तो है, लेकिन काफ़ी नहीं है।" "कहीं भी फाइनेंशियल अस्थिरता हर जगह फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के लिए खतरा बन सकती है।"
मल्होत्रा ने बेहतर और ज़्यादा बारीक डेटा की भी मांग की। उन्होंने कहा कि NBFI, आपस में जुड़े जोखिमों, टेक्नोलॉजी पर निर्भरता और सीमा-पार स्थितियों के बारे में जानकारी अभी भी बिखरी हुई है।
उन्होंने कहा, "तेजी से आपस में जुड़ते फाइनेंशियल सिस्टम में, हमारे डेटा की क्वालिटी ही हमारे रिस्क असेसमेंट (जोखिम के आकलन) की क्वालिटी तय करेगी।"
नई उभरती टेक्नोलॉजी के बारे में मल्होत्रा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टोकनाइज़ेशन और फाइनेंशियल इंटरमीडिएशन के नए तरीके काम करने की क्षमता को काफ़ी बेहतर बना सकते हैं। लेकिन इनोवेशन तभी टिकाऊ होगा जब वह मजबूत संस्थानों, सेटलमेंट की निश्चितता, पैसे की एकरूपता और फाइनेंशियल ईमानदारी को बनाए रखे।
भारत के संदर्भ में मल्होत्रा ने कहा कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में AI से जुड़ी वैल्यूएशन में सुधार (करेक्शन) से देश में कैपिटल फ्लो (पूंजी के प्रवाह) को फ़ायदा हो सकता है।
