अक्टूबर में रेपो रेट पर फैसला, इसके पहले RBI गवर्नर ने वित्त मंत्री सीतारमण से की मुलाकात
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की, जिसमें महंगाई के बढ़ते दबाव, कच्चे तेल की ...और पढ़ें

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा।
HighLights
आरबीआई गवर्नर ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से महत्वपूर्ण मुलाकात की।
बढ़ती महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों पर मौद्रिक नीति की चर्चा।
अक्टूबर एमपीसी बैठक में ब्याज दरें बढ़ने की प्रबल संभावना।
एजेंसी, नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब महंगाई के आउटलुक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मौद्रिक नीति की आगामी दिशा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
वित्त मंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुलाकात की पुष्टि करते हुए कहा, "आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने निर्मला सीतारमण से मुलाकात की।"
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की मजबूत जीडीपी वृद्धि दर दर्ज की है, जबकि वैश्विक आर्थिक माहौल अब भी अनिश्चित बना हुआ है।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी), जो नीतिगत ब्याज दर तय करती है, की अगली बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 के बीच होने वाली है। अगस्त में हुई पिछली बैठक में केंद्रीय बैंक ने लगातार चौथी बार रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा था।
हालांकि, अक्टूबर की नीति समीक्षा को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसकी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के आर्थिक शोध विभाग द्वारा तैयार एसबीआई इकोरैप रिपोर्ट में कहा गया है कि एक महीने पहले की तुलना में अब ब्याज दर बढ़ाने के पक्ष में तर्क काफी मजबूत हो गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ब्याज दर बढ़ाने की आवश्यकता का आकलन अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संभावित फैसलों से अलग है। इसमें कहा गया है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच कच्चे तेल की कीमतें हाल ही में 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुकी हैं, जिससे भारत के महंगाई परिदृश्य के लिए नए जोखिम पैदा हुए हैं।
एसबीआई इकोरैप का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो अक्टूबर और नवंबर में महंगाई दर 6.5 प्रतिशत या उससे अधिक तक पहुंच सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई और वस्तुओं की कीमतों के बदलते माहौल ने मौद्रिक नीति के दृष्टिकोण को भी प्रभावित किया है। एक महीने पहले तक जहां लंबे समय तक नीतिगत स्थिरता बनाए रखने की उम्मीद की जा रही थी, वहीं अब स्थिति बदलती दिखाई दे रही है।
ऐसे में आरबीआई की आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा पर बाजार, उद्योग जगत और निवेशकों की विशेष नजर रहेगी। सभी की रुचि इस बात में होगी कि केंद्रीय बैंक रेपो दर को लंबे समय तक स्थिर रखने की अपनी रणनीति जारी रखता है या बढ़ते महंगाई दबावों को देखते हुए सख्त मौद्रिक नीति की ओर कदम बढ़ाता है।
