जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कोविड-19 ने जिस तरह से अर्थव्यवस्था की गाड़ी के पहिये को पटरी से उतार दिया है उसे देखते हुए गुरुवार को आरबीआइ की मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों में एक और कटौती की उम्मीद जताई जा रही है। रेपो रेट (होम लोन, पर्सनल लोन, आटो लोन आदि से जुड़े कर्ज स्कीमों को प्रभावित करने वाली दरें) में पहले ही 1.12 फीसद की कटौती कर चुके आरबीआइ गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास भी पहले इस तरह का संकेत दे चुके हैं। पिछले दिनों उनके साथ बैठक में वित्त मंत्रालय ने भी यह स्पष्ट किया कि ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश है। 

सीआइआइ, फिक्की, एसोचैम जैसे उद्योग चैंबरों ने भी ब्याज दरों में और नरमी की मांग रखी है। लेकिन पिछले कुछ महीनों का रिकार्ड देखे तो साफ होता है कि इकोनोमी में नया कर्ज लेने की कोई इच्छाशक्ति नहीं है। उम्मीद है कि कर्ज की दर घटाने के साथ ही आरबीआइ गवर्नर कर्ज की रफ्तार बढ़ाने के लिए कुछ दूसरे उपायों की भी घोषणा करें।एक हफ्ते पहले आरबीआइ की तरफ से जारी आंकड़ा बताता है कि अप्रैल से 19 जून, 2020 के दौरान बैंकों से दिए जाने वाले कर्ज में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 1.4 फीसद की गिरावट हुई है। 

कृषि क्षेत्र में कर्ज की रफ्तार में 0.4 फीसद, गैर खाद्य क्रेडिट में 1.8 फीसद, छोटे व मझोले उद्योगों की रफ्तार में 7.6 फीसद और सर्विस सेक्टर को भी कर्ज वितरण की रफ्तार में 2.6 फीसद की गिरावट हुई है। कर्ज वितरण की स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आरबीआइ के आंकडे में 16 वर्गो में बांटा गया है और इनमें से 13 वर्गो में कर्ज की रफ्तार नकारात्मक में है। हाल के दिनों में होम लोन की दरों में बैंकों ने काफी कटौती की है, इसके बावजूद होम लोन की रफ्तार में 0.2 फीसद की गिरावट है।

उपभोक्ता सामान उद्योग खरीद के लिए बैंकिंग कर्ज 4.9 फीसद व आटो लोन में 2.7 फीसद की कमी हुई है।वैसे 19 जून, 2020 को समाप्त पखवाड़े में कर्ज वितरण की स्थिति में सुधार हुआ है। निवेश सलाहकार एजेंसी नाईट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन व एमडी शिशिर बजाज का कहना है कि, ''कर्ज की रफ्तार में कुछ सुधार के लक्षण होने के बावजूद इकोनोमी में मांग की कमी एक बड़ी समस्या है। 

अगर आरबीआइ रेपो रेट में 50 आधार अंकों की और कटौती करता है तो यह मांग को बढ़ाने में काफी मदद कर सकता है। बैंकों को ज्यादा कर्ज बांटने के लिए उत्साहित करने के लिए रिवर्स रेपो रेट में भी कटौती करने की जरुरत है। इकोनोमी की अनिश्चितता को देखते हुए कई बैंक तरलता होने के बावजूद कर्ज देने में जोखिम महसूस कर रहे हैं।'' बैंक ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट कहती है कि ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती होगी लेकिन आगे चल कर संभवत: वर्ष 2021 में आरबीआइ रेपो रेट में एक फीसद और कटौती कर सकता है। अभी रेपो रेट 4 फीसद है जबकि रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी है।

 

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