मुंबई, पीटीआइ। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गोवा के 'द मडगांव अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (The Madgaum Urban Co-operative Bank Limited), मडगांव' का लाइसेंस गुरुवार को कैंसल कर दिया। केंद्रीय बैंक के मुताबिक यह सहकारी बैंक अपनी वर्तमान वित्तीय स्थिति में अपने जमाकर्ताओं को पूरी राशि लौटाने में सक्षम नहीं है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि बैंक द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक करीब 99 फीसद जमाकर्ताओं को डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) से पूरी जमा राशि वापस मिल जाएगी।

जानिए अब क्या होगा

उल्लेखनीय है कि आरबीआई द्वारा किसी बैंक का लाइसेंस कैंसल किए जाने पर लिक्विडेशन के समय हर डिपॉजिटर को DICGC की ओर से पांच लाख रुपये तक की जमा राशि वापस मिल जाती है। पिछले साल सरकार ने बैंक में जमा राशि के इंश्योरेंस कवर को एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया था।

आरबीआई ने इसके साथ ही साथ गोवा स्थित ऑफिस ऑफ रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसायटीज से बैंक को बंद करने और बैंक के लिए एक लिक्विडेटर नियुक्त करने के लिए एक ऑर्डर जारी करने का आग्रह किया है।

रिजर्व बैंक ने कही ये बातेंः

भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि द मडगांव अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक के पास पर्याप्त पूंजी का अभाव है। साथ ही साथ कमाई का प्रोस्पेक्ट भी नजर नहीं आ रहा है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक उक्त सहकारी बैंक बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 के विभिन्न प्रावधानों के अनुपालन में भी विफल रहा है।

आरबीआई ने सहकारी बैंक का लाइसेंस कैंसल करते हुए कहा है, ''बैंक अपनी वर्तमान वित्तीय हालात में अपने वर्तमान जमाकर्ताओं को पूर्ण भुगतान करने की स्थिति में नहीं है। अगर बैंक को आगे बिजनेस की अनुमति दी जाती तो इससे सार्वजनिक हितों पर प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिलता।''

बैंक नहीं कर पाएगा किसी तरह का बैंकिंग ट्रांजैक्शन

आरबीआई ने कहा है कि लाइसेंस कैंसल किए जाने के बाद द मडगांव अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक, मडगांव, गोवा तत्काल प्रभाव से किसी तरह का बैंकिंग ट्रांजैक्शन नहीं कर पाएगा। इस आदेश के बाद बैंक किसी से भी डिपॉजिट नहीं स्वीकार कर पाएगा और ना ही जमा राशि का भुगतान कर पाएगा।

सहकारी बैंक का लाइसेंस कैंसल होने और लिक्विडेशन की प्रक्रिया शुरू होने के साथ डिपॉजिटर्स को उनके पैसे लौटाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

Edited By: Ankit Kumar