नई दिल्ली। भारती सेल्युलर के सुनील भारती मित्तल के बाद अब एस्सार ग्रुप के प्रमोटर रवि रुइया ने राजग काल में अतिरिक्त 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़े मामले में सीबीआइ की विशेष अदालत के समन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

भारती सेल्युलर लि. के सह प्रबंध निदेशक सुनील मित्तल की ऐसी ही याचिका पर सुप्रीम कोर्ट विशेष अदालत की कार्यवाही पर 16 अप्रैल तक रोक लगा चुका है। सीबीआइ की एफआइआर और चार्जशीट में नाम न होने के बावजूद मित्तल, रुइया और हचिसन मैक्स टेलीकॉम प्रा.लि. के तत्कालीन एमडी असीम घोष को विशेष अदालत ने 11 अप्रैल को पेश होने के लिए समन भेजा था। इसी समन को पहले सुनील मित्तल और अब रुइया ने चुनौती दी है।

रुइया ने याचिका में कहा है कि अगर स्टर्लिग सेल्युलर लिमिटेड [जिसके वह निदेशक थे] के कामकाज के मामले में सही तथ्य ट्रायल कोर्ट के समक्ष रखे जाते तो समन जारी नहीं किया जाता। ऐसा लगता है कि कंपनी की सिर्फ कुछ बैठकों की अध्यक्षता करने के कारण ही उन्हें समन भेजा गया है। रुइया ने स्पष्ट किया कि वह उस वक्त कंपनी के किसी कार्यकारी पद पर नहीं थे। एस्सार ग्रुप की स्टर्लिग में बेहद कम हिस्सेदारी थी, जिसे सीबीआइ ने 21 दिसंबर को दायर चार्जशीट में आरोपी बनाया है। हालांकि, सीबीआइ ने सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को कहा था कि जांच में मित्तल के खिलाफ सुबूत मिले हैं। इस पर प्रधान न्यायाधीश अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूछा था कि अगर ऐसा है तो मित्तल का नाम आरोपी के तौर पर चार्जशीट में क्यों नहीं है। पीठ ने यह भी जानना चाहा कि आरोपपत्र में नाम न होने के बावजूद विशेष अदालत ने सीआरपीसी की धारा 319 का इस्तेमाल करते हुए अन्य के खिलाफ समन कैसे जारी किया।