नई दिल्ली (जेएनएन)। भारतीय अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी का जो नकारात्मक असर पड़ा है वो अल्पकालिक है। मंदी का थोड़ा बहुत कारण वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था का लागू होना भी है। यह बात वैश्विक और घरेलू रेटिंग एजेंसी फिच ने कही है।

फिच के निदेशक थॉमस रूकमाकेर (सॉवरिन एंड सप्रैशनल्स ग्रुप) ने कहा, “देश में नोटबंदी लागू करने का उदेश्य काले धन पर काबू पाना था। लेकिन नकदी की किल्लत के चलते मार्च तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की वृद्धि दर प्रभावित हुई।” रेटिंग एजेंसियों के विश्लेषकों के अनुसार वित्त वर्ष 2018 की दूसरी तिमाही में देश की विकास दर एक बार रफ्तार पकड़ेगी।

केयर रेटिंग्स की वरिष्ठ अर्थशास्त्री कविता चाको ने बताया, "भारतीय अर्थव्यवस्था नोटबंदी जैसे एक प्रमुख संरचनात्मक बदलाव से गुजरी है। इसके कारण मांग और आपूर्ति प्रभावित हुई है और इससे समूची अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है।"

कविता चाको ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2017 के जीडीपी के तिमाही आंकड़ों (अक्टूबर-दिसंबर) में तेज गिरावट दर्ज की गई थी। वित्त वर्ष 2017 की तीसरी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर साल दर साल के आधार पर सात फीसद से घटकर 6.1 फीसद रही, जबकि वित्त वर्ष 2017 की चौथी तिमाही में इसमें और गिरावट दर्ज की गई थी। यह अब 5.7 फीसद के स्तर पर आ गई है जो कि बीते पांच वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट रही है।"

वहीं दूसरी ओर, रूकमाकेर ने कहा, "तथ्य यह है कि 99 फीसद बैंक नोट आरबीआई (भारतीय रिजर्व बैंक) के पास वापस आ गए है। इससे यह पता चलता है कि काले धन को मिटाने में नोटबंदी प्रभावी साबित नहीं हुई है। साथ ही इससे असंगठित क्षेत्र का कारोबार भी प्रभावित हुआ है।" जीएसटी व्यवस्था को लागू करने से असंगठित व्यापार को संगठित क्षेत्र से जोड़ने में मदद मिलेगी। ऐसा क्योंकि यह छोटे उद्योगों को भी टैक्स के दायरे में लाएगा।"

स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एसएंडपी) वैश्विक रेटिंग्स के निदेशक (कॉरपोरेट रेटिंग समूह) अभिषेक डांगरा ने बताया, "हम मानते हैं कि रियल एस्टेट और रत्न व आभूषण क्षेत्र को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में नोटबंदी का स्थायी प्रभाव नहीं है।"

फिच के निदेशक (वित्तीय संस्थान) सास्वत गुहा ने कहा नोटबंदी से बैंकों की नकदी बढ़ी, लेकिन कर्ज उठाने का कारोबार कमजोर है, इसलिए इसका बैकों को लाभ नहीं मिल रहा।"

Posted By: Surbhi Jain

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