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राकेश झुनझुनवाला के पैतृक शहर में ऐसा क्या? जो भी वहां से निकला बन गया अरबपति

Published: Sun, 05 Jul 2026 06:15 AM (IST)

आज राकेश झुनझुनवाला की जयंती है, जिनका संबंध राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र से था, जो कई बड़े उद्योगपतियों की जन्मभूमि है।

आज भारत के बिग बुल कहे जाने वाले राकेश झुनझुनवाला की बर्थ एनिवर्सरी है।

आज भारत के बिग बुल कहे जाने वाले राकेश झुनझुनवाला की बर्थ एनिवर्सरी है।

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नई दिल्ली। आज भारत के मशहूर इन्वेस्टर राकेश झुनझुनवाला की जयंती है, जिन्हें "बिग बुल" और "भारत का वॉरेन बफेट" भी कहा जाता है। मुंबई में जन्मे और पले-बढ़े झुनझुनवाला का संबंध राजस्थान के झुंझुनू जिले से था। उनके पूर्वज झुंझुनू के रहने वाले थे, इसीलिए उनके परिवार को 'झुनझुनवाला' सरनेम मिला। हालाँकि, झुंझुनू और पूरा शेखावाटी इलाका न सिर्फ झुनझुनवाला की वजह से मशहूर है, बल्कि यह देश के कई बड़े उद्योगपतियों और बिज़नेस घरानों की जन्मभूमि और कामकाज का केंद्र भी रहा है।

शेखावाटी क्यों कहलाती है 'अरबपतियों की जननी'?

राजस्थान का शेखावाटी इलाका, जिसमें झुंझुनू, सीकर और चुरू जिले शामिल हैं, लंबे समय से देश के सबसे सफल कारोबारी परिवारों का गढ़ रहा है। यह इलाका जमनालाल बजाज, घनश्याम दास बिड़ला, रामेश्वरदास बिड़ला, लाला श्रीराम सिंघानिया, रामकृष्ण डालमिया, लक्ष्मी निवास मित्तल, रुइया, पोद्दार, खेतान, गोयनका, पिरामल और झुनझुनवाला जैसे मशहूर कारोबारी परिवारों से जुड़ा है।

कठिन परिस्थितियों ने गढ़ी व्यापारिक सोच

हालांकि शेखावाटी इलाका अपने रेगिस्तानी भूगोल और कठोर मौसम के लिए जाना जाता है, लेकिन वहां के लोगों ने सीमित संसाधनों के बावजूद व्यापार, उद्यमिता और शिक्षा को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। रोजगार के सीमित अवसरों के कारण युवाओं में नौकरी खोजने के बजाय अपना कारोबार शुरू करने, नए शहरों में व्यापार का विस्तार करने और आर्थिक जोखिम उठाने की सोच विकसित हुई।

यही कारण है कि इस क्षेत्र के लोगों ने देश भर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में अपनी एक मज़बूत पहचान बनाई और कई औद्योगिक समूहों की नींव रखी।

शिक्षा और पेशेवर करियर पर विशेष जोर

शेखावाटी इलाके में लंबे समय से शिक्षा के महत्व को समझा जाता रहा है। यहाँ के परिवार अपने बच्चों को उच्च शिक्षा हासिल करने और प्रोफेशनल क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। यही वजह है कि इस इलाके से बड़ी संख्या में चार्टर्ड अकाउंटेंट, IAS अधिकारी, उद्योगपति, व्यवसायी और कॉर्पोरेट प्रोफेशनल निकले हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां के युवाओं में कम उम्र से ही बिजनेस, फाइनेंस और लीडरशिप की समझ विकसित की जाती है। यही सामाजिक माहौल उन्हें एंटरप्रेन्योरशिप की ओर प्रेरित करता है।

राकेश झुनझुनवाला कैसे बने शेयर बाजार के 'बिग बुल'?

5 जुलाई 1960 को जन्मे राकेश झुनझुनवाला ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुंबई में पूरी की। इसके बाद उन्होंने सिडेनहैम कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और इंस्टीट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया से चार्टर्ड अकाउंटेंसी की पढ़ाई की। बचपन में ही उनकी दिलचस्पी शेयर बाज़ार में हो गई थी, क्योंकि वे अपने पिता को दोस्तों के साथ बाज़ार के बारे में चर्चा करते हुए सुनते थे। हालांकि उनके पिता ने निवेश के लिए कोई आर्थिक मदद नहीं दी, फिर भी उन्होंने 1985 में अपनी बचत के ₹5,000 से निवेश करना शुरू किया।

उन्होंने अपना पहला बड़ा दांव टाटा टी के शेयरों पर लगाया था। उन्होंने ₹43 प्रति शेयर के भाव पर 5,000 शेयर खरीदे और कुछ ही समय बाद उन्हें ₹143 प्रति शेयर के भाव पर बेच दिया, जिससे उन्हें लगभग ₹5 लाख का मुनाफा हुआ।

इसके बाद, उन्होंने टाटा पावर समेत कई ब्लू-चिप कंपनियों में निवेश किया। खास बात यह है कि टाइटन कंपनी लिमिटेड में उनका निवेश उनके करियर की सबसे सफल निवेश कहानियों में से एक बन गया। साल 2002-03 में, उन्होंने ₹5 प्रति शेयर की औसत कीमत पर लगभग 8 करोड़ शेयर खरीदे थे और आने वाले वर्षों में उनकी कीमत कई गुना बढ़ गई।

राकेश झुनझुनवाला ने अपनी निवेश की समझ से अरबों डॉलर की संपत्ति बनाई। उनके निधन के समय, उनकी अनुमानित नेट वर्थ लगभग 5.8 अरब डॉलर थी। अब उनकी पत्नी, रेखा झुनझुनवाला, उनकी विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। फोर्ब्स के अनुसार, उनकी नेटवर्थ 8.6 अरब डॉलर (₹81,885 करोड़) है।

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