नई दिल्ली (जेएनएन)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने मंगलवार को कहा कि बैंकों का मर्जर उस वक्त बेहतर था जब उनकी सेहत ठीक थी और ऐसे में उनकी बैलेंस शीट को साफ करने के लिए अधिक समय दिया जाना चाहिए। चेन्नई में अपनी बुक आई डू वाट आई डू (I Do What I Do) की लॉन्चिंग के मौके पर राजन जो कि मौजूदा समय में शिकागो यूनीवर्सिटी में फाइनेंस के प्रोफेसर हैं ने बताया, “आपको सावधान रहना होगा, क्योंकि मर्जर वक्त लेता है और इसमें काफी सारे प्रयास लगते हैं, विशेषतौर पर तब जब आप डिफरेंट एरिया और कल्चर की अलग अलग एंटिटी का मर्जर कर रहे होते हैं।”

पूर्व आरबीआई गवर्नर राजन ने कहा, “हमें अभी पूरी तरह से डेटा के सामने आने का इंतजार करना होगा ताकि यह समझा जा सके कि उसकी सही लागत क्या रही और उसके फायदे क्या रहे। ऐसा हो सकता है कि हमें इसका कभी पता ही न चले क्योंकि हम कुछ ऐसे क्षेत्रों को नहीं मापते हैं जहां नोटबंदी ने असर डाला है क्योंकि ये अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा थे।”

बेहतर होगा कम बोलें और ज्यादा करके दिखाएं: राजन

सरकार पर अपनी राय देते हुए पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि हमेशा यही बेहतर होता है कि आप कम वादे करें और ज्यादा हासिल करके दिखाएं। उन्होंने कहा कि जब ग्रोथ के संदर्भ में चीन के साथ तुलना की बात आती है तो अजीब सवालों का सामना करना पड़ता है। आपको बता दे कि बीते दो दशकों में राजन एकलौते ऐसे गवर्नर रहे हैं जिन्हें दूसरा कार्यकाल नहीं दिया गया।

नोटबंदी पर सरकार को किया था आगाह:

वहीं नोटबंदी पर बोलते हुए राजन ने कहा कि जब बतौर गवर्नर उनसे नोटबंदी पर सुझाव मांगे गए थे तो उन्होंने कहा था कि लंबी अवधि के संदर्भ में देखें तो इसके फायदे हो सकते हैं लेकिन निकट अवधि में अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा। राजन ने कहा कि फरवरी 2016 में उन्होंने सरकार को इस बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने अपनी किताब के माध्यम से कहा साथ ही उन्होंने कहा था कि ब्लैकमनी को सिस्टम में लाने के लिए नोटबंदी से बेहतर भी उपाय हो सकते हैं।

Posted By: Praveen Dwivedi