नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर (आरबीआई) रघुराम राजन ने व्यापक आधारभूत आर्थिक विकास के लिए एक मजबूत आधार बनाए जाने के साथ ही रोजगार के अवसर पैदा करने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने तर्क दिया कि नौकरियों में आरक्षण का अल्पकालीन समाधान देश के ढ़ांचे को नुकसान पहुंचा सकता है।

अधिकांश लोगों की ओर से महसूस की जाने वाली भेदभाव की समस्या के समाधान पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “इसका एकमात्र समाधान व्यापक आर्थिक विकास है। हमें शिकायतों पर जोर देने के बजाए इस पर ध्यान देने की जरूरत है। (वे हैं) ये अल्पकाल में राजनीति के लिहाज से सुविधाजनक हो सकते हैं, लेकिन इससे देश के ढ़ांचे को नुकसान पहुंचने की संभावना है।”

राजन ने यह टिप्पणी लोकलुभावन राष्ट्रवाद और शक्तिशाली समुदायों के आंदोलनों का जिक्र करते हुए की जिसमें गुजरात का पाटीदार समुदाय भी शामिल है जो कि भेदभाव महसूस कर रहा है और नौकरियों में आरक्षण की मांग कर रहा है।

राजन ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में कहा था, “इसमें (लोकलुभावन राष्ट्रवाद) में विघटन की क्षमता है। मैं बहुत ही आसानी से परिभाषित करूंगा जैसा कि बहुसंख्यक समुदाय महसूस कर रहा है कि उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। ये दुनिया भर में हैं और ये भारत में भी मौजूद है। अक्सर कुछ अंतर्निहित मुद्दे होते हैं जैसे कि नौकरियों का मुद्दा।”

"आभासी लोकतंत्र" के मुद्दे पर उन्होंने कहा, यह चिंताजनक है और इस प्रणाली को हल करने की जरूरत है। गौरतलब है कि राजन ने अपना तीन साल का कार्यकाल बीते साल 4 सितंबर को खत्म किया था और उन्हें बतौर आरबीआई गवर्नर दूसरा कार्यकाल नहीं दिया गया था।

Posted By: Praveen Dwivedi