नई दिल्ली। देश के केंद्रीय जिला सहकारी बैंकों की स्थिति बीते कुछ दशकों में काफी बुरी रही है, लेकिन बीते 8 नवंबर को नोटबंदी के फैसले ने इन बैंकों की स्थिति में सुधार किया है। जानकारी के मुताबिक 17 राज्यों में संचालित हो रहे केंद्रीय जिला सहकारी बैंकों में 10 से 15 नवंबर के बीच 9,000 करोड़ रुपए जमा हुए हैं। इस तरह के बैंक लगातार होने वाले घाटे और बड़े गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों के लिए कुख्यात रहे हैं।

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक नाबार्ड के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर के जी कर्मकार ने बताया, “कई सालों तक इस तरह के केंद्रीय जिला सहकारी बैंक राजनेताओं का चंगुल में रहे हैं, जहां पर वो किसानों के नाम पर खाते खुलवाया करते थे और फिर मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियां अंजाम दी जाती थीं।”

अधिकारियों ने विशेष तौर पर उस वक्त हैरानी जताई थी जब केरल में 1,800 करोड़ रुपए से अधिक की जमा राशि की बात सामने आई थी, जहां पर कृषि की स्थिति ढ़हने की कगार पर है। एक शीर्ष नौकरशाह ने बताया, “केरल के केंद्रीय जिला सहकारी बैंकों में ज्यादातर सीमांत किसानों और छोटे व्यवसायों के बैंक खाते होते हैं। ऐसे में यह जांच का मामला है कि अधिकांश लोन पर निर्भर लोगों के बैंक खातों में 5 दिन के भीतर 1,810 करोड़ रुपए कहां से आ गए।” ठीक इसी तरह पंजाब में 20 से ज्यादा केंद्रीय जिला सहकारी बैंकों में 1,268 करोड़ रुपए जमा हो गए थे।

Posted By: Surbhi Jain

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस