नई दिल्ली, पीटीआइ। पीएसीएल निवेशकों (PACL Investors) के लिए रिफंड के काम को देख रही एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने निवेशकों को कंपनी की योजनाओं में अपने निवेश से संबंधित दस्तावेजों को साझा करने को लेकर आगाह किया है। समिति ने यह कदम यूट्यूब पर आए एक वीडियो के बाद उठाया है, जिसमें एक मोबाइल ऐप के बारे में बताया गया है, जो निवेशकों को उनके क्लेम आवेदन अपलोड करने के लिए आमंत्रित करता है। 

पीएसीएल ग्रुप ने जनता से कृषि और रियल एस्टेट कारोबारों क नाम पर पैसा जुटाया था। बाजार नियामक सेबी ने पाया कि 18 साल की अवधि में अवैध कलेक्टिव इन्‍वेस्‍टमेंट स्‍कीम (CIS) के माध्यम से इस कंपनी ने 60,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई थी। रिटायर जज जस्टिस आर एम लोढ़ा की अध्‍यक्षता में एक समिति बनाई गई है, जो PACL के निवेशकों के रिफंड का प्रबंधन देखती है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (Sebi) द्वारा जारी एक प्रेस रिलीज में लोढ़ा समिति (Lodha committee) ने कहा कि उसे सूचना मिली है कि पांच जून को यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड की गई, जिसमें बताया गया था कि एक मोबाइल ऐप या पोर्टल निवेशकों को ऐप के माध्यम से उनके क्लेम आवेदन अपलोड करने के लिए आमंत्रित कर रहा है। समिति ने कहा कि मोबाइल ऐप जनलोक पीएसीएल डेटा (Janlok PACL Data) गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है और यह जनलोक प्रतिष्ठान संस्थान (Janlok Prathistan Sansthan) द्वारा विकसित होने का दावा कर रहा है।

सेबी ने कहा कि ऐसा लगता है कि मोबाइल ऐप 26 मई से एक्टिव है और दावा किया गया है कि इसका एकमात्र उद्देश्य पीएसीएल निवेशकों को कंपनी से क्लेम की वसूली में मदद करना है। समिति ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा केवल समिति को ही पीएसीएल के निवेशकों को कंपनी से उनके दावों की वसूली में मदद करने का जिम्मा दिया गया है और दूसरा कोई भी व्यक्ति या संस्था निवेशकों से रिफंड भुगतान को प्रभावित करने के लिए दावों को आमंत्रित या एकत्र करने के लिए अधिकृत नहीं है। 

Posted By: Pawan Jayaswal

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