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नई दिल्ली [जयप्रकाश रंजन]। रसोई गैस के कालाबाजारियों पर सरकार ने प्रहार करने का फैसला कर लिया है। देश भर में बड़े रसोई गैस सिलेंडर से गैर कानूनी तरीके से छोटे सिलेंडर में भर कर बेचने वाले कालाबाजारियों की दुकानें अब बंद हो जाएंगी। सरकारी तेल कंपनियों ने अब स्वयं ही दो-तीन किलो क्षमता के सिलेंडर बनाने का फैसला किया है। इनकी मार्केटिंग का नया नेटवर्क भी होगा, जहां हर किसी को आसानी से छोटे सिलेंडर में एलपीजी उपलब्ध हो सकेगी।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि देश में असंगठित क्षेत्र में छोटे सिलेंडरों का एक बहुत बड़ा कारोबार है। दिल्ली के हर बाजार में इन छोटे-छोटे सिलेंडरों में खुलेआम गैर कानूनी तरीके से रसोई गैस भरने का काम होता है। ये अवैध होने के साथ ही बेहद असुरक्षित भी हैं। कई बार ये जानलेवा साबित होते हैं। अब तेल कंपनियों को बाजार मूल्य पर रसोई गैस बेचने का अधिकार मिल चुका है। ऐसे में यह फैसला किया गया है कि तेल कंपनियां इस बाजार में भी प्रवेश करें। योजना यह है कि तेल कंपनियां दो, तीन, पांच, सात और दस किलो क्षमता के सिलेंडर बाजार में उतारें।

ये सिलेंडर मांग पर उपलब्ध होंगे। इन पर किसी प्रकार की सब्सिडी नहीं होगी। इनकी मार्केटिंग के लिए अलग व्यवस्था की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक मौजूदा गैस एजेंसियों के अलावा अलग से गैर सब्सिडी वाले सिलेंडरों की बिक्री करने वाली एजेंसियों की नियुक्ति भी हो सकती है। चूंकि इन छोटे सिलेंडरों में सिर्फ गैर सब्सिडी वाली रसोई गैस की ही बिक्री होगी, इसलिए कोई भी इन एजेंसियों में जा कर इन्हें खरीद सकेगा।

शहरों में बाहर से आने वाले मजदूर या अन्य प्रवासी अवैध तरीके से बिकने वाले छोटे सिलेंडर बाजार में खरीदते हैं। अब ये लोग सरकारी तेल कंपनियों व अधिकृत दुकानों से ये सिलेंडर खरीद सकेंगे। इनकी कीमत भी मौजूदा अवैध बिकने वाले सिलेंडरों के मूल्य से कम होगी। साथ ही इन सिलेंडरों की आपूर्ति दूरदराज के इलाकों में करना भी आसान होगा। पहाड़ी या कम आबादी के इलाकों में बड़े सिलेंडर पहुंचाने में परेशानी होती है। ऐसे इलाकों में इन सिलेंडरों को आसानी से पहुंचाया जा सकेगा।

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