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Crude Oil 100 डॉलर के पार, फिर भी 3 महीने से नहीं बढ़े तेल के दाम; पेट्रोल पर ₹5 और डीजल पर ₹23 लीटर घाटे में ऑयल कंपनियां

Published: Wed, 09 Sep 2026 06:29 PM (GMT+05:30)Updated: Wed, 09 Sep 2026 06:53 PM (GMT+05:30)

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई ...और पढ़ें

डीजल-पेट्रोल की स्थायी कीमत से कंपनियों को घाटा

डीजल-पेट्रोल की स्थायी कीमत से कंपनियों को घाटा

HighLights

  1. कच्चा तेल 100 डॉलर पार, भू-राजनीतिक तनाव मुख्य कारण।

  2. पेट्रोल पर ₹5, डीजल पर ₹23 प्रति लीटर घाटा।

  3. तीन महीने से स्थिर पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इसका असर भारत की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर साफ दिखाई देने लगा है। पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम पिछले तीन महीनों से स्थिर बने हुए हैं, जबकि कच्चे तेल की लागत तेजी से बढ़ी है। इससे सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग ₹5 प्रति लीटर और डीजल पर ₹23 प्रति लीटर तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

आईसीआरए (ICRA) के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एवं कॉरपोरेट रेटिंग्स के को-ग्रुप हेड प्रशांत वशिष्ठ के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है, जबकि भारतीय कच्चे तेल की टोकरी (Indian Crude Basket) का भाव लगभग 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।

उन्होंने बताया कि सितंबर महीने के अब तक के औसत मूल्य के आधार पर पेट्रोल पर मार्केटिंग मार्जिन ₹5 प्रति लीटर और डीजल पर ₹23 प्रति लीटर निगेटिव है। वहीं घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर भी करीब 200 रुपये प्रति सिलेंडर की अंडर-रिकवरी हो रही है।

तीन महीने से नहीं बदले पेट्रोल-डीजल के दाम

देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में आखिरी संशोधन 25 मई को किया गया था। उस समय पेट्रोल के दाम ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल के दाम ₹2.71 प्रति लीटर बढ़ाए गए थे। इससे पहले मई के दूसरे पखवाड़े में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी आने के बाद चार चरणों में पेट्रोल ₹7.35 और डीजल ₹7.53 प्रति लीटर महंगा किया गया था। हालांकि इसके बाद से कच्चे तेल में लगातार उतार-चढ़ाव के बावजूद खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है।

तेल कीमत बढ़ने के 3 प्रमुख कारण

कोटक सिक्योरिटीज की एवीपी कमोडिटी रिसर्च कायनात चैनवाला के अनुसार, तेल बाजार इस समय तीन प्रमुख जोखिमों को एक साथ कीमतों में शामिल कर रहा है। इनमें होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल परिवहन क्षमता पर खतरा, सऊदी अरब के तेल उत्पादन ढांचे पर हमलों का जोखिम और अमेरिका-ईरान के बीच प्रत्यक्ष सैन्य टकराव की आशंका शामिल है। इन तीनों कारकों के एक साथ सक्रिय होने से वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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हालिया तेजी का सबसे बड़ा कारण यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरामको की दक्षिणी सऊदी अरब स्थित ऊर्जा परिसंपत्तियों पर किए गए हमले हैं। इन हमलों के बाद जजान (Jazan) रिफाइनरी में अस्थायी रूप से परिचालन रोकना पड़ा। यह रिफाइनरी प्रतिदिन लगभग चार लाख बैरल तेल प्रोसेस करती है। इसके अलावा अन्य ऊर्जा अवसंरचना पर भी असर पड़ा है।