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'NPS ट्रस्ट को तत्काल भंग करो', AINPSEF ने PM मोदी को लिखा पत्र; ₹17000 करोड़ के पेंशन फंड में गड़बड़ी का आरोप

Published: Wed, 14 Oct 2026 10:35 PM (IST)

ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर NPS ट्रस्ट को तत्काल भंग करने ...और पढ़ें

NPS ट्रस्ट पर वित्तीय गड़बड़ी का आरोप, ₹17000 करोड़ के पेंशन फंड पर उठे सवाल

NPS ट्रस्ट पर वित्तीय गड़बड़ी का आरोप, ₹17000 करोड़ के पेंशन फंड पर उठे सवाल

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बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत कर्मचारियों की पेंशन राशि के प्रबंधन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल ने 14 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर NPS ट्रस्ट को तत्काल प्रभाव से भंग करने की मांग की है। उन्होंने पेंशन फंड में वित्तीय अनियमितताओं, लापरवाही और निजी संस्थाओं को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए। साथ ही, कर्मचारियों के योगदान पर कम से कम 8.25% रिटर्न की गारंटी देने की मांग भी की है।

यह गड़बड़ी तब सामने आई है, जब देश में आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की चर्चा है। जिसमें कर्मचारी NPS, UPS के बजाय OPS यानी ओल्ड पेंशन स्कीम को बहाल करने की मांग कर रहे हैं।

स्टार्टअप में ₹17000 करोड़ लगाने पर सवाल

मंजीत सिंह पटेल ने अपने पत्र में NPS ट्रस्ट और पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) की निवेश योजनाओं पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि 1 अक्टूबर 2026 को NPS दिवस के मौके पर करीब 17,000 करोड़ रुपए वैकल्पिक निवेश फंड (AIF), प्राइवेट इक्विटी, वेंचर कैपिटल और स्टार्टअप में लगाने की बात कही गई।

पत्र के मुताबिक, अल्टेरिया कैपिटल और ट्राइफेक्टा कैपिटल जैसी संस्थाओं का नाम भी इस निवेश योजना के संदर्भ में सामने आया। पटेल ने सवाल किया कि जब कर्मचारियों की पेंशन पर इस तरह के निवेश से मिलने वाले रिटर्न की गारंटी नहीं है, तो इतनी बड़ी रकम जोखिम वाले क्षेत्रों में लगाने का फैसला कैसे लिया जा सकता है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि NPS ट्रस्ट ने इसी मौके पर ट्राइफेक्टा और अल्टेरिया (Trifecta and Alteria) को 400 करोड़ रुपए का प्रतीकात्मक चेक दिया। पटेल ने इन निवेशों और ट्रस्ट की ओर से नियुक्त निजी सलाहकारों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

₹800 करोड़ निवेश नहीं करने से नुकसान का दावा

पत्र में फंड प्रबंधन में लापरवाही का एक और मामला उठाया गया है। पटेल के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने 8 जुलाई 2026 को यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के पूल फंड में 800 करोड़ रुपए जमा किए थे। उनका दावा है कि यह रकम 16 जुलाई तक निवेश नहीं की गई।

पटेल ने आरोप लगाया कि इस देरी के कारण पूल फंड को ब्याज के रूप में 2 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि इस कथित नुकसान की भरपाई कौन करेगा और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए।

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NPS में निगरानी और हितों के टकराव का आरोप

AINPSEF अध्यक्ष ने एनपीएस ट्रस्ट के कामकाज में हितों के टकराव का मुद्दा भी उठाया है। पत्र में ट्रस्ट के चेयरपर्सन दिनेश कुमार खारा के क्रिसिल के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक और K-Fintech के चेयरमैन होने का जिक्र किया गया है। K-Fintech सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसी (CRA) है।

पटेल का आरोप है कि एक ही व्यक्ति के अलग-अलग संस्थाओं में पद होने से निगरानी, फंड प्रबंधन और कर्मचारियों के लेनदेन से जुड़े मामलों में हितों का टकराव पैदा हो सकता है। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदारी तय करने और संबंधित नियमों के पालन की जांच की मांग की है।

हालांकि, पत्र में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना जरूरी है। फिलहाल इन्हें AINPSEF अध्यक्ष के आरोपों और दावों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

हर साल करीब ₹2,500 करोड़ फीस देने का दावा

पटेल ने पेंशन फंड के प्रबंधन पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, हर साल NPS ट्रस्ट को करीब 50 करोड़ रुपए, पेंशन फंड मैनेजरों को 2,000 करोड़ रुपए और CRA को लगभग 250 करोड़ रुपए दिए जाते हैं। इस तरह कुल खर्च करीब 2,300 करोड़ रुपए सालाना बैठता है।

पत्र में पटेल ने दावा किया कि इसके बावजूद इक्विटी योजनाओं का रिटर्न लगातार नकारात्मक रहा है, जबकि कॉरपोरेट डेट और सरकारी प्रतिभूतियों से मिलने वाला रिटर्न भी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की 8.25% ब्याज दर या बैंक एफडी के मुकाबले कम रहा है। उन्होंने फंड मैनेजरों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

UPS पेंशन और न्यूनतम रिटर्न पर भी मांग

पटेल ने कहा कि NPS में न्यूनतम सुनिश्चित रिटर्न योजना (MARS) लागू नहीं की गई। उनके मुताबिक, 2020 की CAG रिपोर्ट में सुझाए गए उपायों पर भी कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने जनवरी 2026 में MARS के लिए गठित PFRDA की उच्चस्तरीय समिति के बारे में भी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।

पत्र में UPS के तहत पेंशन पाने वाले कर्मचारियों की समस्याओं का भी जिक्र है। पटेल का आरोप है कि पिन कोड और ईमेल जैसी छोटी कमियों के आधार पर फाइलें लौटाई जा रही हैं, जिससे कई रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन अटकी हुई है।

मंजीत पटेल ने पीएम मोदी के सामने रखीं 6 मांगें

संगठन ने प्रधानमंत्री से छह प्रमुख कदम उठाने की मांग की है। इनमें NPS ट्रस्ट और उसके निवेशों की उच्चस्तरीय जांच व CAG ऑडिट, ट्रस्ट को तत्काल भंग करना, 800 करोड़ रुपए के पूल फंड में देरी से हुए कथित नुकसान की भरपाई, कर्मचारियों के योगदान पर 8.25% न्यूनतम रिटर्न की गारंटी, सेवा के दौरान NPS या UPS चुनने का विकल्प और हितों के टकराव को खत्म करना शामिल है।

अब इस मामले में सरकार और संबंधित नियामक संस्थाओं की प्रतिक्रिया अहम होगी। कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी रिटायरमेंट की बचत कितनी सुरक्षित है और पेंशन फंड के निवेश में जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जाएगी।