'टाटा संस की लिस्टिंग से टूट जाएगा ग्रुप', Noel Tata ने RBI को चिट्ठी लिख कह दी ये बड़ी बात?
नोएल टाटा ने आरबीआई को पत्र लिखकर टाटा संस की संभावित बाजार लिस्टिंग का विरोध किया है। उनका तर्क है ...और पढ़ें

नोएल टाटा ने आरबीआई को पत्र लिखकर टाटा संस की संभावित बाजार लिस्टिंग का विरोध किया है।

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नई दिल्ली। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को पत्र लिखकर टाटा संस (Tata Sons) की किसी भी संभावित बाजार लिस्टिंग का विरोध किया है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, उनका तर्क है कि शेयर बाजार में लिस्टिंग होने से टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी का लंबे समय में स्वरूप बदल सकता है और टाटा ट्रस्ट्स के परोपकारी उद्देश्यों में बाधा आ सकती है।
टाटा समूह का मूल ढांचा बिखर जाएगा
टाटा ट्रस्ट्स, जो कि टाटा संस का नियंत्रक शेयरधारक है। उसका मानना है कि लिस्टिंग से कंपनी की प्राथमिकताएं बदल जाएंगी। कंपनी का ध्यान 'दीर्घकालिक संस्था-निर्माण' से हटकर 'अल्पावधि की बाजार उम्मीदों' को पूरा करने पर केंद्रित हो सकता है।
मनीकंट्रोल के मुताबिक चर्चाओं में शामिल एक सूत्र ने कहा कि, "यह समूह को तोड़ देगा। टाटा संस के सार्वजनिक शेयरधारकों की प्राथमिकता अल्पावधि में मुनाफा कमाना होगा।" ट्रस्ट ने सरकार और केंद्रीय बैंक को स्पष्ट किया है कि टाटा संस ऐतिहासिक रूप से रणनीतिक क्षेत्रों में दीर्घकालिक पूंजी निवेश करने का माध्यम रहा है। सूत्रों के मुताबिक, "टाटा संस एक प्राइवेट इक्विटी की तरह है, लेकिन एक सामाजिक चेतना के साथ है।"
निवेशकों का दबाव
यदि टाटा संस लिस्ट होती है, तो सार्वजनिक शेयरधारक संभवतः एयर इंडिया या सेमीकंडक्टर जैसे व्यवसायों में निवेश का समर्थन न करें, क्योंकि इनमें अल्पावधि में नुकसान हो सकता है।
टाटा के काम पर इसका क्या असर पड़ेगा?
टाटा ट्रस्ट्स स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, जल और स्वच्छता जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर काम करता है। ट्रस्ट का तर्क है कि उनके धर्मार्थ कार्यों को समर्थन देने की क्षमता सीधे तौर पर टाटा संस के मौजूदा स्वामित्व ढांचे और उससे मिलने वाले डिविडेंड (लाभांश) से जुड़ी है। लिस्टिंग से इस ढांचे में कोई भी बदलाव उनके बड़े पैमाने पर चलने वाले सामाजिक अभियानों को प्रभावित कर सकता है।
