नई दिल्ली, जेएनएन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की। पैकेज की सूची से स्पष्ट है कि सरकार की नजरें मिड टर्म और लांग टर्म कदमों पर है। रोजगार से लेकर देश की तस्वीर तक सबकुछ इन्हीं पर निर्भर करेगी। देश की जीडीपी में लगभग 29 फीसद हिस्सा देने वाले एमएसएमई पर सरकार मेहरबान रही। यही सेक्टर लगभग 11 करोड़ रोजगार देता है, जबकि लांग टर्म प्रयास वक्त की कसौटी पर परखे जाएंगे। फिलहाल यह कहना भी मुश्किल है कि बड़े फैसलों से होने वाले बदलाव से भारत में कितना निवेश आएगा। कोरोना से जूझने के जज्बे के साथ भारत समेत तमाम देशों में लॉकडाउन खुल रहा है लेकिन भविष्य को लेकर अब तक असमंजस है। लगातार बदलती वैश्विक परिस्थिति में वक्त हर फैसले को परखेगा। असली समीक्षा तभी होगी। लेकिन इतिहास गवाह है कि जिसने साहस के साथ कदम बढ़ाया उसे चूमा भी गया है।

शार्ट टर्म या त्वरित असर

  • एसएमएमई सेक्टर के बकाये कर्ज का 20 फीसद के बराबर राशि कर्ज के तौर पर।
  • छोटी कंपनियों के बकाये का भुगतान 45 दिनों के भीतर।
  • ईपीएफओ योगदान में तीन महीने की राहत।
  • कृषकों को फसल ऋण पर ब्याज सब्सिडी देने की सुविधा की अवधि 31 मई तक बढ़ाई।
  • राज्यों को प्रवासी श्रमिकों को राहत पहुंचाने के लिए एसआरडीएफ से राशि लेने की सुविधा।
  • शहरी गरीबों को मदद के लिए 7200 नए स्वयं सहायता समूहों का गठन ।
  • घर लौटने वाले प्रवासी मजदूरों को मनरेगा में रोजगार देने के लिए 40 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त अनुदान।
  • न्यूनतम मजदूरी तय करने के नियम में सुधार, प्रवासी मजदूरों को दो महीने का और राशन ।

मिड टर्म यानी मध्यकाल में असर

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  • एमएसएमई सेक्टर के लिए 3 लाख करोड़ रुपये के कर्ज को सरकार की गारंटी।
  • एमएसएमई को चार वर्षों के लिए कर्ज एक वर्ष प्रिंसिपल भुगतान पर मोरोटोरियम।
  • संकटग्रस्त एसएमएमई को 20 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त कर्ज की उपलब्धता।
  • 75 हजार करोड़ रुपये एनबीएफसी, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों और एमएफआई को स्पेशल लिक्विडिटी।
  • रेलवे, राजमार्ग, सीपीडब्लूडी समेत दूसरे केंद्रीय संगठनों के ठेकेदारों को ठेके की अवधि में छह महीने की वृद्धि।
  • रियल एस्टेट कंपनियों को रेरा कानून से राहत, टीडीएस व टीसीएस की दर में कटौती।
  • आय कर रिटर्न भरने संबंधी अवधि को बढ़ाने का फैसला।
  • विवाद से विश्वास स्कीम के तहत रिटर्न भरने में राहत।
  • वन नेशन-वन राशन कार्ड की व्यवस्था लागू करना।
  • राशन कार्ड की पोर्टेबिलिटी लागू करना मुद्रा शिशु लोन से मदद पहुंचाना।
  • प्रवासी मजदूरों को दूसरे राज्यों में भी राशन का सामान देने की घोषणा।
  • गली-मोहल्लों में रेहड़ी लगाने वालों को 50 हजार करोड़ रुपये का कर्ज देना।

लांग टर्म यानी दीर्घकाल में असर

  • एमएसएमई के लिए 50 हजार करोड़ रुपये का फंड्स ऑफ फंड की स्थापना, एमएसएमई की परिभाषा बदली।
  • 200 करोड़ रुपये के वैश्विक टेंडर में सिर्फ देश की कंपनियों को इजाजत।
  • डिस्काम को संकट से निकालने के लिए 90 हजार करोड़ रुपये।
  • नाबार्ड के जरिए कृषि कार्यों के लिए 30 हजार करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा।
  • पूरे देश में श्रमिकों को एक समान न्यूनतम मजदूरी देने की व्यवस्था।

प्रवासी मजदूरों को श्रम कानून के तहत ज्यादा अधिकार देने नियुक्ति पत्र देने, अंतर-राज्यीय प्रवासी मजदूरों को ज्यादा अधिकार देने, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सोशल सिक्यूरिटी सुरक्षा देने का फैसला, मजदूरों को किराये का मकान देने के लिए आवासीय परियोजना लगाना, राज्य व केंद्रीय संगठनों को सस्ते आवासीय परियोजना लगाने के लिए  मदद देना, मध्यम वर्ग को सीएलएसएस के तहत होम लोन पर कर्ज पर सब्सिडी देने की व्यवस्था मार्च, 2021 तक लागू, ढ़ाई करोड़ किसानों को किसान क्रेडिट काड देश में परमाणु ऊर्जा रिएक्टर बनाने के लिए निजी क्षेत्र के साथ पीपीपी मॉडल पर होगा काम।

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बिजली सेक्टर में टैरिफ पॉलिसी रिफार्म, ग्राहकों को चौबीसों घंटे मिलेगी बिजली समय पर होगा बिजली उत्पादन, कंपनियों को भुगतान, सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को वायबिलिटी गैप फंडिंग के लिए 8100 करोड़ रुपये, स्पेस क्षेत्र में निजी सेक्टर को आमंत्रण।

कृषि के लिए ढांचागत सुविधाओं के विकास पर एक लाख करोड़ रुपये होंगे खर्च।

माइक्रो फूड इंटरप्राइजेज को 10 हजार करोड़ रुपये की स्कीम, मछलीपालकों के लिए पीएमएमएवाई के तहत 20 हजार करोड़ रुपये का ऋण-55 लाख लोगों को रोजगार।

खुरपका व मुंहपका बीमारी के लिए 13,334 करोड़ रुपये।

पशुपालन इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के लिए 15 हजार करोड़ रुपये, हर्बल कल्टिवेशन के लिए 4 हजार करोड़ रुपये।

किसानों को देश में कहीं भी अपने उत्पाद बेचने की आजादी।

मधुपालन के लिए 500 करोड़ रुपये।

आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन ताकि किसानों को उनके उत्पाद की बेहतर कीमत मिले।

  • कोयला सेक्टर में कमर्शियल माइनिंग को मंजूरी।
  • पहले चरण में 50 कोयला ब्लाक निजी क्षेत्र को सौंपने की तैयारी।
  • कोल गैसिफिकेशन व कोल बेड मिथेन में निजी सेक्टर को आकर्षक बनाने के उपाय।

500 खनन ब्लाकों को निजी सेक्टर को देने की तैयारी, डिफेंस सेक्टर में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ा कर 74%, समयबद्ध तरीके से होगी रक्षा उपकरणों की खरीद।

  • 50 हजार करोड़ रुपये का होगा निवेश, खनन सेक्टर में सुधार।
  • नागरिक उड्डयन कंपनियों को देश में ज्यादा एयरस्पेस देने की तैयारी।
  • ज्यादा हवाई अड्डों का निर्माण निजी क्षेत्र के साथ मिल कर पीपीपी मॉडल।

Posted By: Nitesh

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