नई दिल्ली: टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) से शुक्रवार को कोई राहत नहीं मिल पाई। मिस्त्री के परिवार की दो कंपनियों की ओर से दायर याचिका टिब्यूनल ने खारिज कर दी। इसमें टाटा संस के बोर्ड से मिस्त्री को हटाने के लिए 6 फरवरी को बुलाई गई असाधारण आम बैठक पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

ट्रिब्यूनल ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को सम्मानजनक समझौता करने की सलाह दी क्योंकि इससे दोनों पक्षों की छवि को नुकसान हो रहा है। इससे उनके कारोबारी हित और उनके कर्मचारियों का हौसला भी प्रभावित हो सकता है। जस्टिस एस. जे. मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली ट्रिब्यूनल की दो सदस्यीय बेंच ने कहा कि हम याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं देंगे और उनकी तीनों याचिकाएं रद करते हैं। विस्तृत आदेश में बाद में दिया जाएगा। सुनवाई शुरू होते ही बेंच ने दोनों पक्षों से वकीलों से कहा कि वे सम्मानजनक समझौता करने का रास्ता निकालें। इसके बाद सुनवाई 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। इसके बाद भी दोनों पक्ष कोई सहमति नहीं बना पाए।

गौरतलब है कि 103 अरब डॉलर वाले टाटा संस के बोर्ड में मिस्त्री अभी भी निदेशक के तौर पर शामिल हैं। बीते साल अक्टूबबर में एक नाटकीय घटनाक्रम में मिस्त्रीो को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटा दिया गया था। उनकी जगह रतन टाटा ने अंतरिम चेयरमैन की जिम्मेयदारी संभाली थी।

Posted By: Praveen Dwivedi

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