नई दिल्ली [सुरेंद्र प्रसाद सिंह]। ग्रामीण विकास मंत्रालय की अहम योजना 'आजीविका' कुछ राज्यों में केंद्रीय सिल्क बोर्ड के सहयोग से चलेगी। नक्सल प्रभावित झारखंड, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में यह योजना [आजीविका] शुरू की गई है। टसर रेशम को उन्नत बनाने की इस परियोजना में राज्य स्तरीय एजेंसियां कीड़े पालने व उत्पादन में तकनीकी व वैज्ञानिक सहयोग देंगी। परियोजना में आदिवासी परिवारों और महिला स्वयं सहायता समूहों [एसएचजी] को तरजीह दी जाएगी।

रेशम कीड़ों को पालने वाली इस परियोजना में केंद्रीय सिल्क बोर्ड को ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से 70 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय मदद दी जाएगी। ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर परियोजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी है।

झारखंड के सबसे अधिक सात जिले गोड्डा, पाकुर, दुमका, सरायकेला, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और देवघर को इस परियोजना में स्थान दिया गया है। 'आजीविका' अति गरीब परिवारों को लाभ पहुंचाने के लिए शुरू की गई है। इसके तहत इन परिवारों की रोजी-रोटी के लिए प्रशिक्षण के साथ कुछ ऐसे ही व्यवसायों में सहयोग दिया जाता है। राज्य को कुल 24 करोड़ रुपये की मदद मुहैया कराई जाएगी।

बिहार से केवल बांकुरा जिले को इस परियोजना में रखा गया है और इसके लिए राज्य को नौ करोड़ रुपये की मदद दी जाएगी। पश्चिम बंगाल के दक्षिण बांकुरा और पश्चिम मिदनापुर जिले को परियोजना का लाभ मिलेगा। इसके लिए राज्य को साढ़े पांच करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। परियोजना को सहयोग देने वाली एजेंसियां रेशम कीड़ों की उन्नत प्रजातियों के विकास, लघु स्तर पर बीज उत्पादन और उत्पादकों की मदद के लिए सामूहिक मार्केटिंग की सुविधा मुहैया कराएंगी।

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