नई दिल्ली। मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन का कहना है कि 1960 के दशक में बैंकों का राष्ट्रीयकरण करना सरकार का सबसे बड़ा अपराध था।

आज यहां आईजीसी-आईएसआई इंडिया डेवलपमेंट पॉलिसी कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि भारत में बैंकों का राष्ट्रीयकरण एक ऐतिहासिक गलती थी। सरकार ने 1969 में 14 कॉमर्शियल बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था और 1980 में छह और बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया।


सुब्रमण्यन ने कहा कि सरकार को अब विभिन्न सरकारी बैंकों के लिए अलग-अलग रिकैपिटालाइजेशन स्ट्रेटजी अपनानी होगी। उन्होंने कहा कि बैंक के लिए सभी के लिए एक आकार की रणनीति सही नहीं है। सुब्रमण्यन ने कहा कि कुछ बैंक को छोटा करने की जरूरत है, इसके अलावा डाइवर्सीफाइ और ज्यादा लाइसेंस देने की भी जरूरत है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को पब्लिक सेक्टर बैंक रिकैपिटालाइनेशन पर डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेस सेक्रेटरी हसमुख अढि़या और फाइनेंस सेक्रेटरी राजीव महर्षि से मुलाकात भी की। 2015-16 के बजट में पब्लिक सेक्टर बैंक में कैपिटल इनफ्यूजन के लिए 79.40 अरब रुपये का प्रावधान किया गया है।


सुब्रमण्यन ने आगे कहा कि भारत में बैंकिंग सेक्टर को बेहतर दिवालियापन कानून की आवश्यकता है। पिछले साल अगस्त में दिवालियापन कानून में बदलाव के लिए सुझाव देने हेतु एक कमेटी का गठन किया गया था। एक मार्च को जेटली ने कहा था कि सरकार 2015-16 में व्यापक दिवालियापन कानून लेकर आएगी।

सुब्रमण्यन ने कहा कि पिछले कुछ माह में मैक्रो-इकोनॉमिक कंडीशन बेहतर हुई है। हालांकि उन्होंने कहा कि वैश्विक पर्यावरण भारत की ग्रोथ पर अड़ंगा लगा सकते हैं। सुब्रमण्यन ने यह भी कहा कि सरकार को केरोसिन की सब्सिडी डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर के जरिये देनी चाहिए।

कब हुआ था बैंकों का राष्ट्रीयकरण

इंदिरा गांधी ने अपने प्रधानमंत्रित्वकाल में बैंकों के राष्ट्रीयकरण का अहम फ़ैसला किया था। उन्होंने 19 जुलाई, 1969 को 14 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया था। इन बैंकों पर अधिकतर बड़े औद्योगिक घरानों का कब्ज़ा था। इसके बाद राष्ट्रीयकरण का दूसरा दौर 1980 में हुआ जिसके तहत सात और बैंकों को राष्ट्रीयकृत किया गया। अब भारत में 27 बैंक राष्ट्रीयकृत हैं। इसके पहले तक केवल एक बैंक- भारतीय स्टेट बैंक राष्ट्रीयकृत था। इसका राष्ट्रीयकरण 1955 में कर दिया गया था और 1958 में इसके सहयोगी बैंकों को भी राष्ट्रीयकृत कर दिया गया।

कई विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीयकरण के बाद भारत के बैंकिंग क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। हालांकि भारत में अब विदेशी और निजी क्षेत्र के बैंक सक्रिय हैं। लेकिन एक अनुमान के अनुसार बैंकों की सेवाएं लेनेवाले लगभग 90 फ़ीसद लोग अब भी सरकारी क्षेत्र के बैंकों की ही सेवाएं लेते हैं।

Posted By: Shashi Bhushan Kumar