चेन्नई, आइएएनएस। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि एफडीआइ नियमों में सुधार की वजह से विदेशी निवेश में इजाफा होगा। बैंकों द्वारा आयोजित ग्राहक मेले के आयोजन में नकवी ने शनिवार को कहा कि हाल के समय में सरकार ने कई सेक्टर के लिए एफडीआइ नियमों में सुधार किया है। इससे निवेश बढ़ेगा, जिससे रोजगार में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा पिछले कुछ समय से सरकार इकोनॉमी के क्षेत्र में लगातार सुधार कर रही है। सरकार द्वारा की गई घोषणाओं से भारत बिजनेस के अनुकूल जगह बनेगा। इससे समाज के सभी तबकों को बराबर के मौके मिलेंगे और लोग संपन्न होंगे। सरकार द्वारा उठाए गए कदम देश को पांच टिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने में मददगार साबित होंगे।

नकवी ने कहा कि भारत ने चार क्षेत्रों में बिजनेस को आसान बनाया है। इसमें नया बिजनेस शुरू करना, दिवालियापन का समाधान करना, सीमा के पार बिजनेस करना और परमिट देना, जैसे सुधार शामिल हैं। इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड (आइबीसी) ने बैंकिंग सेक्टर के सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नकवी ने बैंकों के विलय के फैसले की तारीफ करते हुए कहा कि बैंकिंग सुधार के क्षेत्र में यह बड़ा फैसला है।

गौरतलब है कि इस वर्ष 28 अगस्त को एफडीआइ की नई नीति पेश की थी। इसके तहत सरकार ने कोल माइनिंग और कांट्रैक्ट मैन्यूफैक्चरिंग में 100 परसेंट विदेशी निवेश की मंजूरी देने के अलावा सिंगल ब्रांड रिटेल में एफडीआइ के नियमों को आसान बनाने का एलान किया है। सरकार ने प्रिंट मीडिया की तर्ज पर डिजिटल मीडिया में भी 26 परसेंट एफडीआइ की इजाजत दी।

इसलिए अहम था बदलाव

देश की इकोनॉमी को रफ्तार देने के लिए विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ाने को काफी अहम माना जा रहा है। इंडस्ट्री की तरफ से इस आशय की मांग सरकार से लगातार की जा रही थी। खासतौर पर कई विदेशी कंपनियों को देश में मैन्यूफैक्चरिंग के लिए प्रोत्साहित करने में सरकार के इस फैसले का अहम योगदान होगा। कैबिनेट ने कांट्रैक्ट मैन्यूफैक्चरिंग में ऑटोमेटिक रूट से 100 परसेंट एफडीआइ की अनुमति देने का फैसला किया। अब तक सिर्फ मैन्यूफैक्चरिंग के लिए ही 100 परसेंट एफडीआइ की अनुमति थी। लेकिन अब कोई कंपनी कांट्रैक्ट के आधार किसी अन्य कंपनी से मैन्यूफैक्चरिंग कराएगी तो उसमें भी 100 परसेंट ऑटोमेटिक एफडीआइ नीति लागू होगी।

अभी एफडीआइ की यह स्थिति

वर्ष 2014-15 से 2018-19 तक पांच वर्षो के दौरान भारत में 286 अरब डॉलर एफडीआइ आया है जबकि 2009-10 से 2013-14 तक पांच वर्षो में 189 अरब डॉलर एफडीआइ आया था। हकीकत यह है कि वित्त वर्ष 2018-19 में भारत में 64.37 अरब डॉलर एफडीआइ आया है जो किसी वित्त वर्ष में अब तक की सबसे बड़ी रकम है।

Posted By: Pawan Jayaswal

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